Cute Love Stories in Hindi। क्यूट लव स्टोरीज इन हिंदी

Cute Love Stories in Hindi। क्यूट लव स्टोरीज इन हिंदी

Cute Love Stories in Hindi:

आज मै आपके लिए एक बहुत ही अच्छी कहानी Cute Love Stories in Hindi लेकर आया हूं। ये कहानी बहुत अच्छी है और एक बहुत बड़े राइटर द्वारा लिखी हुई है। इस कहानी को पढ़ने के बाद आपको अंदाजा होगा की आखिर सच्चा प्यार होता क्या है। आप इस कहानी को पढ़े और बताएं ये कहानी आपको कैसी लगी

Cute Love Stories in Hindi:

Cute Love Stories in Hindi। क्यूट लव स्टोरीज इन हिंदी

"जल्दी ,जल्दी, जल्दी कर यार!! मैं लेट नहीं होना चाहती!" दिविशा कब से चिल्लाये जा रही थी।

बिन बेग पे पसरी हुई दो लड़कियाँ बोली - यार तू टाइम पे ही पहुँचेगी कहो तो हम पहुंचा दे।

दिविशा - यार मदद करनी है तो करो वरना अपने मुँह पे ताला मार लो..मिस दीपिका एंड पुष्पा देवी।

पुष्पा भड़क गई- ओए कॉल मि पू!!

दिविशा - चुप कर तू आयी बड़ी पु वाली!! अंकल आंटी ने इतना प्यारा नाम दिया है वही रख।

दिविशा जल्दी से बाथरूम में गयी और ड्रेस पहन के आयी। वो पिंक कलर का शूट था । और उसपे पीले कलर का दुप्पटा लगा हुआ था। दिविशा ने आयने में खुद को देखा और चेहरे को देखते हुए कानो में झुमके पहनने लगी।हल्के गुलाबी होठों के लिए लिपबाम काफी थी। आँखों में काजल और बस उसके लिए इतना काफी था।

वो मुड़ के बोली -" कैसी लग रही हूं!"

दीपिका - बोले तो पटाखा लग रही है पर बाल स्ट्रैट कर ले।

दिविशा बालों को संवारते हुए बोली - नो कर्ल ही ठीक है।

पुष्पा - पर क्यों?

दिविशा - उसे कर्ल पसंद है ना!!

पुष्पा ने दिविशा के कंधे पे हाथ रखा-" ओए होय!!क्या बात है इतना तो भाई हम भी अपने बॉयफ्रेंड से न मिले कभी।

दिविशा ने अपना कंधा झटका - चुप करो दोनों ..और वापिश आकार किस्सा सुनाऊ तब तक कार्टून देखो बैठ के!

दीपिका -ओक आल द बेस्ट बेबी!

दिविशा मुस्कुराते हुए बाहर निकली । और नदी के पास वाले पार्क में जाकर बैंच पे बैठ गयी।

थोड़ि देर बाद ही उन दोनों का फोन आया - अरे आ गए क्या लाड साहब!!

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दिविशा -अभी कहाँ यार!

दीपिका - क्यों??

दिविशा - मैं आधे घण्टे जल्दी आ गयी हूँ।

दीपिका और पुष्पा ने एक दूसरे का मुँह देखा और जोर से हँस पड़ी -" भाई इतनी बेताबी!!चल फिर तू एन्जॉय कर हम डिस्टर्ब नहीं करे!".

दिविशा ने फ़ोन रखा और नदी के बहते पानी को देखने लगी। तभी उसे किसी के आने की आहट हुई। उसने मुड़ के देखा तो सामने आशीष खड़ा था।ब्लैक शर्ट और जीन्स में बहुत अच्छा लग रहा था।हाथ में घड़ी, ऊपर से अच्छे से सेट किये हुए बाल और हल्की सी बियर्ड और श्वेत वर्ण का मासूम चेहरा।

अब हालात ये थी कि दोनों क्या बोले दोनो की ही समझ नहीं आ रहा था। दोनो इधर- उधर देखने लग गए। और फिर एक-दूसरे की तरफ देख के हँस पड़े।

दिविशा - तो कैसे है आप जनाब!! ऐसे फ़ोन पर तो बड़ी बातें करते हो कि ये करेंगे वो करेंगे और अभी तो मुँह से बोल भी ना फुट रहे आपके!!

दिविशा के हँसने की वजह से आशीष ने अपना हाथ सर के पीछे रखा और बोला - वो मैं थोड़ा नर्वस था! समझ नही आ रहा क्या बोलूं..तुम्हे यूँ सामने देख के समझ ही नहीं आ रहा क्या बोलूं!!"

दिविशा को बहुत हँसी आ रही थी वो आशीष को चिढ़ाने के लिए उसके पास आई और बोली - तो फिर बताइये ना आप क्या बोलने वाले थे!

आशीष का मुँह शर्म से लाल टमाटर सा हो गया। दिविशा जोर से हँसने लगी।

आशीष मुश्किल से बोल पाया - अच्छा चलो बैठ के बात करते है!

दिविशा ने हामी भरी तो वो दोनो साथ-साथ नदी के किनारे से होकर ओपन रेस्टोरेन्ट की तरफ बढ़ गए।वो दोनो बैठे और दोनो ने कॉफी आर्डर की।

आशीष - वैसे एक बात कहें?

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नदी के नजारे से नजर हटा कर दिविशा ने कहा - हम्म बोलिये!! वैसे आप हमें आप कहते हुए भी अच्छे लगते है!!

आशीष हँस पड़ा - वो तुम बहुत अच्छी लग रही हो इस ड्रेस में!

दिविशा - हम सझते लाखों में है और आप तारीफ चवन्नी में करते है हमारी। खैर, ये बताइए कि हम रोज अच्छे नहीं लगते क्या?!!

दिविशा आज आशीष को सताने के फुल मूड में थी।आशीष जल्दी से बोला - नहीं ऐसी बात नहीं है आप तो हमेशा ही अच्छी लगती है..पर पिंक और येल्लो में एकदम कमाल लगती है!"

ये कहते कहते आशीष फिर से शर्माने लगा था। दिविशा मुश्किल से हँसी कंट्रोल कर पा रही थी वो बोली - वैसे आप से एक बात कहें!!

आशीष - हाँ बोलिये!!

दिविशा - आप शर्माते हुए एकदम बवाल लगते है।

आशीष - जे तो हम रोज ही लगते है..आप ही पहली बार नोटिस किये है!!

दिविशा - बस बस अब इतना भी नहीं! कही नजर लग गयी तो कहाँ उतरवाएँगे!!

आशीष - आप खाने में कुछ लेना चाहेंगी!!

दिविशा -खाने में नहीं पीने में लेना चाहेंगे..वो भी विश्की आपके साथ नैनीताल में!!

आशीष - अरे आप तो बड़ी फ़ास्ट फॉरवर्ड निकली।

दिविशा हँस पड़ी - स्ट्रैट फॉरवर्ड होता है वो!!

आशीष - अरे अब आप से सिख लेंगे ना सब!

दिविशा उसी की भाषा में बोली - जे भी सही है!!

अब दोनों उठे और उस शहर की गलियों में घूमने लगे।दिविशा ज्वेलरी को देखते हुए चल रही थी तो आशीष बोला - हम..वो हम आपको एक शायरी सुनाएँ..हमने लिखी है।

दिविशा - अरे वाह शायरी भी लिखी है आपने शायर साहब..तो सुनाईये ना!

आशीष ने गला साफ किया और बोला -
मेरी जिंदगी की तुम हो आशा...
मेरे मन की हो तुम भाषा..
सब से अलग सबसे प्यारी..
सबसे सुंदर हो तुम मेरी दिविशा!!

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थोड़ि देर दिविशा आशीष को देखती रही फिर हँसते हुए उसके गाल खींचते हुए बोली - अरे इतने क्यूट क्यों हो तुम!! सच बताऊँ इतनी प्यारी शायरी हमने आज तक नहीं सुनी! वैसे इतने पसंद आ गए क्या हम आपको?!!

आशीष - आप तो हमें बहुत पसंद है! आ..आप इतनी अच्छी है कि पसंद आ ही जाती है।।

दिविशा - ओह्ह तो ये बात है..!!वैसे बताइये हमने आज पिंक क्यों पहना है।

आशीष -क्योंकि आपको पसंद है।

दिविशा - नहीं तो।

आशीष समझते हुए बोला - मतलब ये ह..हमारे लिए आपने...

दिविशा - आ हाँ ! और किसके लिए पहनेंगे।

आशीष का तो शर्माना ही खत्म नहीं हो रहा था।अब दोनों थोड़ि दूर गए तो वहाँ पे स्ट्रीट फूड बन रहे थे तो दिविशा एक के पास गई और बोली - भैया एक प्लेट चाऊमीन  हमें बनाने दो।

वो अगला मां गया तो दिविशा ने बनाई और आशीष को खिलाने लगी। वो बहुत स्पाइसी थी इसलिए आशीष के आँशु आ गए। दिविशा ने दुप्पटे से हँसते हुए आँशु पोंछे और आशीष भी हँसने लगा।

दोनो ने गोलगप्पे, कचोरी समोसे सब खाये या ये कहे कि दिविशा ने अपने हाथ से आशीष को खिलाएं। अब वो बातें करते - करते बोटिंग वाले एरिया में आ गए और दिविशा ने जिद्द की ,की उसे नाव पे जाना है।

उन दोनों ने नाव ली और बोटिंग के लिए निकल गयी। दिविशा के चेहरे की खुशी तो जा ही नहीं रही थी । इतना
प्यारा नजारा जो दिख रहा था। और साथ में आशीष।शाम के समय वो काफी देर तक घाट पे बैठ कर बातें करते रहे ।और दिविशा उसके सर को सहलाती रही।

अब काफी शाम हो गयी तो दोनों बजरंग बली के मंदिर में गए। दिविशा ने दुप्पटा सर पे लिया और अपनों की सलामती की प्राथना की और आशीष के मिलने का शुक्रिया अदा किया।

वो दोनों अब प्रसाद बाँटते हुए बाहर आये तो आशीष बोला -हम ये पूछ रहे थे कि आप वापिश कब आएंगी।

दिविशा शरारत से बोली -और हम क्यों आये वापस!!

आशीष - न ..नहीं हमारा मतलब आपको अच्छा लगता है तो आ जायेगा ना प्लीज।

दिविशा उसके गले लगते हुए बोली - अरे हमारे भोले भंडारी..कहाँ थे आप इस दुनियाँ में अब तक। जल्द आयेंगे पर तब तक अपना ध्यान रखिएगा।

दिविशा ने उसे बाय कहा और दौड़ते हुए मंदिर के बाहर चली गयी। आशीष जल्दी से वहाँ बने कमरे की छत पे गया और जाति हुई दिविशा को पुकारा तो दिविशा ने मुड़ कर देखा उसके घुंघराले बाल हल्के से चेहरे पे आ गए।

दिविशा ने हँसते हुए हाथ हिलाया। और उसकी तरफ देखते हुए फ्लाइंग किस दिया।

आशीष ने शर्माते हुए अपने दोनों हाथों को सीने से लगा दिया।

दिविशा उसे देखते हुए हँस पड़ी - पगलु कहीं का!!

और जब तक वो ऑटो में नहीं बैठी तब तक आशीष की तरफ हाथ हिलाती रही..

समाप्त!!

दीक्षा चौधरी।

Cute Love Stories in Hindi: तो ये थी हमारी आज कि कहानी और मै आशा करता हूं ये आपको जरुर पसंद आई होगी अगर आपको ये Cute Love Stories in Hindi अच्छी लगी हो तो आप हमें कॉमेंट सेक्शन मै जरुर बताए!!


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