Love Stories In Hindi। Love Story In Hindi (प्रेम कहानी)

Love Stories In Hindi। Love Story In Hindi

Love story in hindi:

हेल्लो कैसे हो आप लोग में आशा करता हूं आप सब ठीक होंगे अगर आप love story पढ़ने का शौक है तो ये कहानी आपको बहुत ही ज्यादा पसंद आयेगी क्युकी ऐसी कहानी आपने आज तक नहीं पढ़ी होगी। ये कहानी एक बहुत बड़ी राइटर दीक्षा चौधरी द्वारा लिखी गई है। तो आप इस कहानी को पढ़िए और हमें कमेंट करके बताएं कि आपको ये कहानी आखिर कैसी लगी!!

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छोटू बनारस की गलियों में दौड़ते हुए " हिन्दू विश्विद्यालय"
के सामने जा खड़ा हुआ और वहाँ बाहर आती हुई दो लड़कियों को पुकारा :: मीरा दिदी !! वो आने वाले हैं..!

मीरा ये सुन जल्दी से पीछे मुड़ी और दौड़ते हुए उसके पास आई और बोली :: कब ? कहाँ ? कैसे?

छोटू साँस लेते हुए बोला :: अरे हमको साँस तो लेने दो मीरा दिदी .. आज शाम को आने वाले हैं ,उनका ट्रांसफर फिर बनारस हो गया है ।

मीरा खुशी से झूम उठी ,उसने छोटू को पैसे दिए औऱ बोली :: जाके लाला जी की दुकान से जलेबी खा लेना ,हमारी तरफ से ट्रीट समझो ! और उन्हें कह देना वहीं पे आके मिले जहाँ से ये कहानी शुरू हुई थी ।

मीरा अपनी दोस्त निधि के साथ जल्दी से अपने घर की तरफ जाने लगी ..उसने जल्दी से दरवाजा खोला और बेग को एकतरफ फेंकते हुए बोली :: हमें समझ नहीं आ रहा हम क्या करें ..क्या पहनें ..एक साल बाद वो आ रहें है ..पता नहीं कैसे होंगे हमारे  S.P.  साहब !

निधि आराम से बिनबेग पे पसरते हुए बोली :: पहली बात कुछ भी पहन लें उन्हें तू हर रंग में अच्छी लगती है ..और जा अब जल्दी कर !

मीरा जल्दी से रूम में आई और लाल कलर का सूट निकाला ..जल्दी से पहना और दुप्पटा एकतरफ कर लिया ..उसने कानों में बुन्दे पहने पर फिर निकाल के झुमके पहन लिए .. लंबे और हल्के घुँघराले बालों को खुला छोड़ दिया ..उसने छोटी सी बिंदी लगाई और बाहर जाने लगी लेकिन फिर वापिस मुड़ी और बिंदी हटा ली ..उसका हल्का गेंहुआ रंग और निखर रहा था ।

वो सीढ़ियों से जल्दी से उतरी और जल्दी से बाहर निकल गयी ।

निधि पीछे से आवाज़ दे रही थी :: अरे ध्यान से जाना ..ये ना हो कि गली का कोई सांड पीछे पड़ जाये !

पर मीरा को तो बस घाट पे पहुँचना था ..वो दौड़ती हुई गयी और सीढ़ियां उतरते हुए पास की चाय वाली दुकान की तरफ हाथ हिला के बोली - भैया ..एक कुल्हड़ वाली चाय !

वो लड़का बोला :: अभी बना के देते हैं जीजी !

शाम का वक़्त हो चुका था  मीरा हाथ में चाय लिए बैठी थी और पानी की तरफ देखने लगी.. तभी पंडितजी आये और प्रसाद देते हुए बोले :: अरे मीरा बिटिया बड़ी खुश लग रही हो का बात है ?

मीरा प्रसाद लेते हुए बोली :: अरे आज वो आ रहें हैं !

पंडित जी मीरा को देख के बोले :: अरे वो कौन बिटिया !

मीरा नजरें झुकाते हुए बोली :: अरे वही S.P.  साहब !

पंडित जी थोड़ा हँसते हुए बोले :: ओह्ह तो कबीर आ रहा है ..तो आधे बनारस को तो पता चल ही गया होगा कि हमारा दामाद आ रहा हैं !

मीरा बोली :: जाते जाते कांड ही ऐसा कर के गए थे ना तो पता तो चलेगा ही !

पंडित जी हँस पड़े : कांड नहीं बिटिया ..तुझे अपनी अमानत बना के इस शहर को सौंप गया था ..गंगा मैया तुम दोनों का साथ हमेशा बनाये रखे ..तुम दोनों की प्रेम कहानी का तो शहर भी साक्षी है !

मीरा कुछ नहीं बोली तो पंडित जी ने उसके सर पे हाथ रखा और बोले :: तुम दोनों का ये पहला प्यार ..बनारस की शाम की तरह है ..निर्मल ,पवित्र ,शांत !

पंडित जी चले गए ..पर मीरा के अतीत के पन्नों को खोल गए .. मीरा  अपने अतीत में खो गयी ...

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एक साल पहले ...

हिंदू विश्विद्यालय में नए विद्यार्थियों का स्वागत समारोह रखा गया था ..जब खत्म हुआ तो सब अपने अपने घरों की तरफ चल पड़े ..

निधि और मीरा सड़क के एक तरफ ऑटो का इंतज़ार कर रही थी .. ऑटो तो नहीं आया पर बारिश आ गयी ।

मीरा ने काले रंग की साड़ी पहन रखी थी और बालों को खुला छोड़ रखा था .. मीरा तो बारिश के पानी में झूमने लगी और कब सड़क के बीच चली गयी उसे भी नहीं पता था ।

निधि ने उसे पुकारा - अरे  हम लैट हो जाएंगे और सड़क के बीच में क्या कर रही इधर आ ..!

मीरा अभी भी बारिश में भीगते हुए बोली :: हमें बनारस की दो ही चीज़ें सबसे ज्यादा पसंद है ..एक तो कुल्हड़ वाली चाय और दूसरी ये पानी की बरसात !

निधि ने सर पिट लिया क्योंकि उसे पता था कि मीरा बहुत जिद्दी है वो नहीं मानेगी ।

तभी दूसरी तरफ से एक गाड़ी आने लगी ..लेकिन मीरा इतनी मगन थी कि उसे किसी का ध्यान नहीं था ..वो गाड़ी बिल्कुल पास आ गयी तो किसी ने मीरा का हाथ पकड़ा और सड़क के किनारे ले आया पर जल्दबाजी में वो सड़क के पास बने पेड़ से जा लगी ..वो इंसान उसके पास आया तो मीरा ने देखा कि वो पुलिस की वर्दी में था और  वर्दी से वो बड़ी पोस्ट का ऑफिसर लग रहा था ।

उसने पेड़ के एकतरफ हाथ रखा और मीरा की तरफ देखा ..उस ऑफिसर के रेनकोट  पहने होने की वजह से मीरा को सिर्फ उसके होंठ दिख रहे थे !

और अँधेरे की वजह से उस लड़के को सिर्फ मीरा की बड़ी बड़ी आँखे ही दिख रही थी ..!

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मीरा ने उसकी नेमप्लेट पढ़ी " कबीर रावत"..उसकी साँसे ही अटक गई और वो मन में सोचने लगी :: अब तो तू गयी बेटा ! ये आज तुझे नहीं छोड़ेगा ..निकल ले मीरा वरना तो गयी काम से !

मीरा जाने लगी तो कबीर ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला -इतनी जल्दी भी क्या है ..अभी तो शौक से तुम बारिश में भीग रही थी अब क्या हो गया.. नहीं भीगना ?

मीरा नीचे नजरें किये हुए बोली :: माफ कर दीजिए सर हम आगे से ध्यान रखेंगे !

कबीर ने उसे अब ध्यान से देखा  , लंबे बाल जिनमें से बूंदे टपक रही थी बड़ी बड़ी आँखे जो अभी झुकी हुई थी ..फड़कते होंठ ..और सिहरती काया !

कबीर की नजर थम सी गयी पर मीरा की आवाज़ से वो होश में आया  ,वो बोले जा रही थी ," सर ध्यान ही नहीं रहा कि कब ये सब हो गया ..हमें जाने दीजिए हम आगे से ध्यान रखेंगें !

कबीर बस इतना ही बोल पाया :: प्लीज ध्यान रखिएगा ..जाइये !!

मीरा तो ये सुन वहाँ से ऐसी छूटी जैसे वर्षों का कैदी छूटते ही भागता है !

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वो और निधि पैदल ही चल पड़ी ..और मीरा को शांत देख निधि बोली :: यार कितना हैंडसम था ना वो पुलिस ऑफिसर ..तेरी जगह मुझे क्यों नहीं पकड़ा उसने !

मीरा को गुस्सा तो आ ही रहा था और वो उसपे फुट पड़ा ..हाँ क्यों नहीं ..बस ये देखा कर की कौनसा लड़का हैंडसम है ..कौनसे लड़के ने कौनसी लड़की को ताड़ा ..सब तुझे पता होता ही है।

निधि : अच्छा  बताना जरा ..हमको किस लड़के का पता है !

मीरा :: सारे बनारस के लड़कों का ..की गुप्ता जी का लौंडा किस लौंडिया को ताड़ रहा है ..मिश्राजी का लौंडा कब छत से उठ के नीचे गया !

निधि झेंपते हुए बोली :: वो तो दिख जाते है ..तो का आँखे बंद करे !

मीरा : देखो मुँह ना खुलवाओ हमारा ..चुपचाप घर चल लो !
निधि भी उसके तेवर देख के चुप चाप उसके साथ हो ली !

इधर कबीर कब से उस तरफ देख रहा था जहाँ से मीरा गयी थी ..तो उसका दोस्त अजय पीछे से गुनगुनाता हुआ आया ," एक लड़की भीगी भागी सी ..सावन की सुनी रात में ..मिली एक अजनबी से कोई आगे न पीछे "

ये सुन  के कबीर  पीछे मुड़ा ..औऱ अजय से बोला : ड्यूटी के टाइम ये सब क्या है !

अजय उसके कंधे पे हाथ रख के बोला - बर्खुद्धार हम तो आपका हाल-ए- दिल बयाँ कर रहें है !

कबीर :: बहुत हो गया अब काम पे ध्यान दे ले !
अजय : हमारा ध्यान तो काम पे ही है ..पर आज आप खोया खोया चाँद के जैसे हो रखे हैं।

कबीर ने कुछ नहीं कहा और वहाँ से चला गया !

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सुबह हो गयी थी ..मीरा और निधि कॉलेज में आ गयी ..आज सुबह से ही किसी के आने की खबर थी और उसी की तैयारीयाँ जोर से चल रही थी ।

मीरा और निधि भी सबके साथ खड़ी हो गयी तभी वहां के H.O.D   आये और बोले :: हमारे ही कॉलेज के एक होनहार विद्यार्थी जिन्होंने आईएएस बन के हमारा नाम रोशन किया है ,और इसी के साथ वो हमारे बनारस में ही S.P. के रूप में कार्यरत हैं ।और इसी खास सख्शियत से हम आप सब की मिलवाना चाहते है ..प्लीज वेलकम मिस्टर कबीर रावत !

ये सुनते ही मीरा के तो होश ही उड़ गए ..वो सोचने लगी कि कहीं मेरी शिकायत ना कर दे ..कबीर मुस्कुराते हुए आया ..और उसे देख सारी लड़कियाँ एक दूसरे से बातें करने लगी और  उसे देख के मन ही मन खुश हो रही थी ।

मीरा ने निधि का हाथ पकड़ा और वहाँ से बचते बचाते निकल गयी ..और बाहर आके चैन की सांस ली !

निधि :: यार देखने देते ना हमें !
मीरा :: एक लप्पड़ देगे तुझे ..लभड़ कहीं की ..वो कबीर रावत है कल रात वाला ..हमें देख लिया ना तो गए काम से !

निधि अब मन मसोस के रह गयी । इधर कबीर अब ऑफिस में था और सब प्रोफेसर्स से बात कर रहा था ..तो एक ने कहा " आप बनारस अच्छे से घूम लीजिए ..काफी बदल गया है बनारस ..बस नहीं बदला तो घाट की वो चाय और खुशनुमा शाम !

कबीर : हाँ पर हमें घुमायेगा कौन ?

पीछे से आते हुए H.O.D.  बोले :: मीरा श्रीवास्तव ! सबसे होनहार लड़की है वो कॉलेज की !

मीरा को बुलवाया गया तो मीरा आयी ..लेकिन जैसे ही कबीर को देखा डर से वापिस मुड़ गयी !

कबीर उसे देख के मुस्कुराते हुए बोला :: बिल्कुल सही कहा होनहार तो ये बहुत है !

प्रोफेसर्स मीरा की तरफ आये और बोले :: तुम कबीर को बनारस घुमा लाओ ..तुमसे अच्छा तो कौन समझा सकता है ।

मीरा मन में बोली :: उड़ गए तोते ..सब को मैं ही मिली थी इनके साथ फंसाने को !

कबीर और मीरा बाहर निकल गए ..कबीर ने उसे देखा कि वो अभी भी रात वाली बात से डर रही हैं..तो वो उसे शांत करते हुए बोला :: रात गयी बात गयी ! मैं इतना बुरा भी नही की किसी की परिस्थिति का फायदा उठाऊँ !

मीरा ने राहत की सांस ली और उसके साथ चल पड़ी ..

बनारस की गलियों को दिखाते हुए जहाँ ..चूडियाँ ..कंगन ..झुमके हर जगह दिख रहे थे ..कबीर उन सब को कम मीरा के बोलने के अंदाज को ज्यादा देख रहा था ।

मीरा ने अन्यास ही कबीर का हाथ पकड़ा और गोलगप्पे वाले के पास ले आयी ,कबीर बस अपने हाथ को देखे जा रहा था जो मीरा ने पकड़ रखा था ।

मीरा बोली :: आपको पता है.. ये यँहा के फेमस गोलगप्पे हैं ..हमें तो तीखा पसंद है आपको कितना तीखा पसंद हैं उस हिसाब से बनवा देते हैं ।

कबीर उसे देखते हुए ही बोला :: जैसा आपको ठीक लगे ।

मीरा ने तीखे गोलगप्पे बोल दिए ..मीरा तो मजे से खाये जा रही थी और कबीर की आँखों में तीखेपन की वजह से आँशु आ रहे थे ..मीरा ने देखा तो अपने दुप्पटे से आँशु पोंछे और गोलगप्पे का हिसाब कर दिया ।

कबीर :: हम दे देते हैं।

मीरा :: हमारे शहर में खातिरदारी हम ही करेंगे ..पर तीखा पसंद नहीं था तो बोल देते ना।

कबीर उसके चेहरे को देखते हुए बोला :: अब से पसंद हैं।

मीरा उसकी हालत देख हँस जा रही थी तो कबीर बोला :: अब हो जाता है  कभी कभी ।

मीरा हँसते हुए बोली :: S.P.  साहब अगर कोई चीज़ पसंद ना हो तो बोल दीजियेगा ..जबरदस्ती नहीं हैं ।

कबीर को पहली बार किसी लड़की ने साहब बोला ..जो उसे बहुत अच्छा लगा ।

अब दोंनो घाट की तरफ बढ़ गए ..शाम हो चुकी थी ..पक्षी अपने घरौंदों की तरफ लौट रहे थे ..मीरा ने दो कुल्हड़ वाली चाय ली और घाट के एक छोर पे जाके बैठ गयी और साथ में कबीर भी ..कबीर तो बस मीरा को सुन रहा था ।

मीरा चाय की चुस्की लेते हुए बोली : आपको पता है हम यँहा रोज आते हैं ..ये सुरमयी शाम ..हाथों में चाय और गंगा का ये निर्मल घाट और  पानी की आवाज़ ..ऐसा लगता है अलग ही दुनियाँ में हैं ...!

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कबीर उसके चेहरे पे आती जाती बालों की लटों को देख रहा था .. और मुस्कुरा के चाय पीने में मशगूल हो गया ।

दोनों काफी देर खामोशी से बैठे रहे फिर मीरा उठते हुए बोली :: चलिये ना नाव की सवारी करें !

मीरा के बच्चों जैसे आग्रह पे वो मान गया और उसके साथ चल पड़ा .. पहले कबीर नाव पे गया फिर हाथ पकड़ के मीरा को नाव पे ले आया ..दोनों अंदर बैठ गए ..मीरा इशारे से शहर को बता रही थी और साथ में हँसते हुए बातें भी बता रही थी ।

कबीर को आज पहली बार अलग ही अहसास हो रहा था ..वो चाहता था जैसे ये पल और लम्हा यहीं थम जाए ..उसने आज तक किसी की बात एक मिनट तक नहीं सुनी थी वो आज एक लड़की को लगातार सुन रहा था और सुनना चाहता था ।

कबीर को अपनी देखते पाकर मीरा ने उसके चेहरे पे चुटकी बजायी :: कहाँ खो गए ? है ना हमारा बनारस खूबसूरत !!

कबीर उसके चेहरे को मुस्कुराते हुए देख के बोला :: बेहद खूबसूरत !!

मीरा भी उसकी तरफ देखने लगी फिर पलकें झुका ली !

रात हो गयी थी तो गंगा मैया की आरती भी हो गयी और सैंकड़ो दीपक नदी में झिलमिलाने लगे . कबीर और मीरा ने भी एक दीपक जलाया और एक साथ नदी में छोड़ दिया ।

दियों के प्रकाश में दोनों ही बड़े प्यारे लग रहे थे ।

अब वो दोनों बनारस की गलयों में एक साथ चल रहे थे तो मीरा ने कहा :: एक बात पूछे ?

कबीर : पूछिये !

मीरा :: ये प्यार कैसे होता है ?

कबीर हँसते हुए बोला :: आप उस चैप्टर को खोलना चाहती है जो हमने कभी पढ़ा ही नहीं !

मीरा भी अपने सवाल पे हँस पड़ी ।

कबीर बोला :: औऱ आप प्यार किसे मानती हैं ?

मीरा हल्का सा मुस्कुराते हुए बोली :: जब हम हजारों के बीच रह  कर भी सिर्फ एक के हो जाये। दिन में बहुत से चेहरों से मिले पर रात के उस आखिरी पहर में हमें बस वो याद आये ..जब कोई ना दिखे सिर्फ उसका चेहरा याद हो।

कबीर बस उसे सुनते रहा ..तभी देखा कि उसके झूमके में मीरा के बाल फंस गए ..तो वो बिना पूछे उन्हें हटाने लगा ..मीरा ने इतने करीब से पहली बार कबीर को देखा था ..खामोश चेहरा जो बहुत कुछ बोल रहा था..आँखे जिनमें कोई सवाल नहीं था  ..फिर भी वो खुद एक सवाल थी ।

वो दोनों अलग हुए और कबीर मीरा को उसके घर छोड़ अपने घर आ गया .. दोनों अपने अपने कमरे की खिड़की के पास खड़े होके हवा को महसूस कर रहे थे ..जहन में बस पूरे दिन की बातें थी ।

निधि मीरा के पास आई और बोली :: क्या बात है मंद मंद मुस्कुराया जा रहा हैं !

मीरा :: ऐसा कुछ नहीं है ..सो जा चुपचाप !

और दोनों सोने चली गयी ।

काफी दिनों तक कबीर और मीरा शाम के वक़्त ऐसे ही वक़्त बिताते ..अहसास दोनों को था शुरवात कोई नहीं करना चाहता था ..ये पहला पहला प्यार था ..बयाँ दोनों से नहीं हो रहा था !

पर एक दिन शाम के समय जब वो दोनों घाट के पास मछलियों को दाना दे रहे थे तभी कुछ लड़कियाँ आयी और कबीर से बातें करने के बहाने ढूँढने लगी ..और सात - आठ लड़कियाँ होने की वजह से मीरा काफी दूर हो गयी उससे ।

मीरा इनसब को देखती रही और फिर खुद ही दूर होती गयी ..और वहाँ से चली गयी .. कबीर की नजरें उसे ढूंढती रही पर वो जा चुकी थी ।

निधि ने मीरा को ऐसे आते हुए देखा तो कहा :: अरे कबीर कहाँ हैं? ..आज अकेले !

मीरा :: उनके पास बहुत सी है हमारी जरूरत नहीं है उन्हें !

निधि :: ऐसा क्यों बोल रही है ?
मीरा उसकी तरफ देखते हुए बोली :: क्योंकि यही सच हैं !

निधि को समझ आ गया कि वो अभी गुस्से में है ..इसलिए उसने कबीर को फ़ोन पे सब बता दिया ।

कबीर ने ये सुना और कुछ सोचने लगा ।

अगली सुबह मीरा कॉलेज आयी और कबीर को गेट पे देखा पर उसने नजरंदाज किया और बिना देखें आगे चली गयी ।

कबीर ने उसे पुकारा :: बात सुन लो मेरी ..कल से कॉल कर रहा हूँ ..उठा नहीं रही हो । देखो बात नहीं सुनी तो सबके सामने कह दूँगा ।

मीरा गुस्से से मुड़ी ::: क्या कह देंगे आप हाँ ..मैं डरती नहीं हूं आपसे मिस्टर रावत !

कबीर :: साहब कहो ना ..ज्यादा प्यारी लगती हो।

मीरा :: नहीं कहेंगे कुछ ..जाइये अपनी फुलजड़ियो के पास !

ये कह के मीरा गुस्से में अंदर चली गयी ..और कबीर उसके प्यार वाले गुस्से पे हँस पड़ा ।

शाम को पूरी कॉलेज एक मैदान में इखट्टा हो रखी थी ! शायद कोई फंक्शन था ..मीरा की डांस परफोर्मेंस थी पर  जिसे कृष्ण बनना था वो नहीं आया था ..और वो राधा के गेटअप में परेशान हो घूम रही थी ।

तभी स्टेज पे कृष्ण के रूप में कबीर था ..मीरा आश्यर्य से वहाँ देख रही थी ।

कबीर ने उसकी तरफ देखा और माइक लेके बोला :: तो मीरा जी क्या हाल है ..कहा था ना मान जाइये वरना सबके सामने बोल देंगे ।

कबीर का ये रूप देख मीरा के साथ साथ सब हैरान थे ।

कबीर :: इधर उधर की बातें किये बिना बोलता हूं ," ओ राधे राधे राधे ! तेरे बिना कृष्णा तो लगे आधे आधे आधे !

औऱ पूरा मैदान में खड़े लोग तालियां बजा उठे !

मीरा स्टेज पे गयी और कबीर का हाथ पकड़ ले जाने लगी तो ,कबीर ने उसे पकड़ के अपनी तरफ खींचा :: अभी तो हम शुरू हुए है ..इतनी भी क्या जल्दी है ।

मीरा :: प्लीज साहब चलों यँहा से .!

कबीर :: और ना जाएं तो ?
मीरा गुस्से में बोली :: ठीक है फिर हम जा रहे !

कबीर ने जाती हुई मीरा का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ कर माईक में बोला :: मीरा जी आप हमारी थी, हैं ,और हमारी ही रहेंगी ..हम बताने चाहते हैं कि हम यहाँ से जा रहे है पर अपनी अमानत छोड़ के जा रहे है .. उम्मीद है ये शहर इस कृष्णा की राधा का ख्याल रखेंगे ।

मीरा तो हैरान होके खड़ी थी तो कबीर उसके पास आते हुए बोला :: और हाँ हमारी सिर्फ एक ही फुलजड़ी है जो सामने खड़ी हैं।

ये सुनकर सबकी हँसी एक साथ गूँज उठी और मीरा ने शर्म से नजरें झुका ली ।

कबीर बोला :: अब ये आप पे निर्भर करता है कि आप इस कृष्णा को अपना बनाएंगी या फिर ये कृष्णा गोपियों के पास चला जाए।

मीरा दौड़ती हुई उसके पास आई और उसे कस के गले लगा लिया ।

पूरा मैदान राधे कृष्णा के जय कारों से गूंज उठा !

वर्तमान.....

किसी ने मीरा के आगे चाय कर दी तो मीरा ने मुड़ के देखा तो सामने कबीर खड़ा था ।

मीरा ने उसे देखा और कस के गले लगा लिया ।

कबीर :: सब देख रहे हैं मीरा !

मीरा सीने से लगी हुई बोली :: अच्छा और जो आपने एक साल पहले पूरे बनारस के सामने किया वो क्या था ..तब लोगों ने नहीं देखा ?

कबीर हँस पड़ा ..कबीर ने मीरा को गोद में उठाया और घाट के छोर पे ले आया ..ये पहला पहला प्यार आज भी वैसा ही था जब ये अहसास पहली बार हुआ था ।

मीरा ने कबीर के कंधे पे सर टिका दिया और ढलते हुए सूरज को हाथों में हाथ लिए देख रहे थे ...

समाप्त!!

@दीक्षा चौधरी

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Special thanks to Diksha Choudhary

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