Love Story In Hindi। Love Stories In Hindi (एक अनोखी प्रेम कहानी)

Love Story In Hindi। Love Stories In Hindi 

Real love story in hindi:

आज मै आप सबके लिए अथर्व अनामिका की कहानी True love story in hindi लेकर आया हूं ये कहानी आपको बहुत अच्छी लगेगी इसमें दो गावों कि दुश्मनी है जो कि आपको जरुर पसंद आयेगी और ये कहानी पढ़कर आप इसकी तारीफ किए बिना रह नहीं पाएंगे ये कहानी खुद मेरे द्वारा लिखी गई है आप इसे पढ़कर कॉमेंट जरुर करे हमें बताएं!!

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Love story in Hindi। Love Stories in Hindi।

Love story in Hindi

एक नया सफर एक नई कहानी दो दिलों की अनकही दास्तां आशा करते है आपको पसंद आएगी!

एक गांव जो बसा हुआ है नदी के बीच में जिसके चारों ओर नदी बहती है यहां पर किसी का कानून नहीं चलता यहां पर जानता की अदालत चलती है जो यहां के राणा जी कह दे वही सही होता है,, दूर दूर तक जंगल फैला हुआ है जहां पर शिकार आसानी से नहीं किया जा सकता एक बीहड़ जो इतनी बड़ी है जिसमे पूरा एक गांव बसाया जा सकता है गोली बंदूकों स खेलना इनका शौक है और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ है!!

राणा जी ठाकुर के आदमी आए है और हमारी तरफ की लड़की को उठा ले गए,,तुम चलो ओर याद रखना छोटे साहब को पता नहीं चलना चाहिए,,जी मालिक!!

रामू सब लोगो को कह दो तैयार रहे आज तो खून की होली खेली जाएगी उन्होंने आज हद पार कर दी है,, जी बड़े मालिक हम अभी सब लोगो को कह देते है,,सारे लोग हथियारों से लेश तुरंत ही बड़े हवेली के आंगन में इकट्ठा हो जाते है,,तभी दूर से कोई आता हुआ दिखाई देता है,,एक वृद्ध आदमी जिसके चहरे पर अलग ही नुर था और देखने में ऐसे लग रहा था जैसे इसे बहुत अनुभव है!!

ये क्या कर रहे हो तुम मल्हार राणे ( बड़े मालिक),,, पधारो हुक्म कैसे आना हुआ,, हमारी छोड़ो तुम ये बताओ अगर आज तुमने ठाकुरों पर हमला कर दिया तो खून की नदिया बह जाएंगी दोनों गावों की मुसीबत ओर दुश्मनी हद से ज्यादा बढ़ जाएगी,,तो आप ही बताओ हुकुम क्या करना चाहिए,,तभी एक बाशिंदा बीच मै बोल बोल पड़ता है छोटे सरकार को खबर कर देते है वो सब देख लेंगे,,तभी मल्हार बीच मै उसे कहते है तेरा दिमाग खराब हो गया रामू अगर उसे पता चला तो वो आग लगा देगा ठाकुरों की हवेली मै,, रामू सही कह रहा है राणे उससे हम बात करेंगे तुम खबर भिजवा दो हम आए है,, जैसा आप कहें हुकुम!!

पढ़े: एक अनोखी प्रेम कहानी

Love story in Hindi:

तभी छोटे साहब को खबर दी जाती है और सब उनका बाहर इंतज़ार कर रहे थे गर्मी की चिलचिलाती धूप थी तभी दूर एक जिप्सी गाड़ी आती हुई दिखाई देती है ओर बाहर से खबर आती है कि छोटे मालिक गांव मै आ गए है,, सभी बाहर जाते है,,,थोड़ी देर बाद गाड़ी मै से एक लड़का उतारता है कद लंबा रंग गोरा ओर गर्मी की धूप से उसके सर पर से पसीना टपक रहा था ओर उसके चहरे का तेज सूर्य के समान था सभी उसके स्वागत में खड़े थे उसके आते ही आसमांन मै गोलियां चलाई जाती है,,तभी हुकुम कहते है आओ अथर्व बेटा गले से लग जाओ बड़े दिनों बाद आए हो ,, नाना जी हम आपसे मिलने को कबसे बेताब थे ओर आप अब आए हो हमसे मिलने,,,बेटा आज भी हमे मजबूरन आना पड़ा,,आप हमारे साथ अंदर चलो हम आपको सब विस्तार से बताते है!!

जैसे ही सब अंदर जाते है मल्हार राणे बीच आंगन मै बैठे हुए थे ओर बेटे को आता देखकर खड़े हो जाते है ओर उसे गले से लगा लेते है,, कैसे हो बेटा आप,,हम ठीक है पर आप इतने परेशान क्यों लग रहे हो बापू सा क्या हुआ है,,बेटा भदोरी गांव के ठाकुर हमारे गांव की लड़की को उठा ले गए है,,उनकी हिम्मत कैसे हुई हमारी इज्जत पर हाथ डालने की हम उन्हे जिंदा नहीं छोड़ेंगे,, अथर्व आपको इसलिए बुलाया गया है पर पहले पूरी बात पता करनी होगी नहीं तो एक की गलती की सजा दोनों गावं की निर्दोष जनता को भुगतनी पड़ेगी!!

ठीक है नाना जी हम आज ही उनके गांव जाएंगे,,पर बेटा दुश्मन के घर अकेले जाना आपकी जान को खतरा है,, अथर्व राणे किसी खतरे से नहीं डरता नाना जी हम आज ही उस गांव जाएंगे वो भी अकेले,, ठीक है बेटा पर अपने कुछ लोगो को तो साथ लेकर जाओ,,नहीं बापू सा ऐसे तो उनको शक हो जाएगा,,ठीक है जैसी आपकी मर्जी आप जाइए हमे आप पर पूरा यकीन है!!

दूसरी तरफ भदोरि गांव मै हल्ला हो गया कि कोई सरबरपुर गांव की लड़की को उठा लाया है सब तरफ बाते होने लगी ओर कहा जाने लगा ऐसा तो सिर्फ बड़े ठाकुर के लोग कर सकते है हम छोटे लोगो की इतनी मजाल कहा जो उनकी इज्जत पर हाथ डाले,,पर भईया कुछ भी हो अब तो संग्राम होगा देखते है मल्हार राणे जी क्या करते है!!

ये खबर उड़ते उड़ते ठाकुरों की हवेली मै पहुंच गई ओर अम्मा जी ने सब लोगो को इकठ्ठा किया ओर ओर एक बैठक बुलाई गई,, तभी बड़े ठाकुर आते है ओर सब उनके सम्मान में खड़े हो गए,,क्या बात है मां सा आज सबको इस तरह क्यों बुलाया है,,आओ जयसिंह बैठो खबर मिली है कि कोई राणे गांव की लड़की को भगा लाया है अब अगर मल्हार को पता चला तो गोलियां चल जाएंगी,,पर मां सा ऐसा कोई नहीं कर सकता है हमारे गांव मै सब जानते है इतनी पुरानी दुश्मनी है,,पर कुछ तो हुआ है जयसिंह पता करो कौन है वो नामुराद हम उसके हाथ कटवा देंगे बेटी किसी भी गाव की हो वो हमारी इज्जत होती है!!

तभी पीछे से एक मधुर आवाज आती है,,क्या प्यार करना गुनाह है बापू सा,, सब पीछे मुड़कर देखते है एक लड़की जो फूल की तरह नाजुक थी उसको देखकर ऐसा लगता था जैसे कुदरत ने सारी सुन्दरता इसको दे दी हो लंबे बाल ओर लहंगा पहना हुआ है हाथ मै चूड़ियां है देखने मै बहुत सुंदर,,तभी अम्मा जी बोलती है अनामिका तुम यहां क्या कर रही है ठाकुरों के घर की लड़कियां बड़ो के बीच मै बोला नहीं करती,,ओर याद रखो तुम्हे घर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं है,,तभी अनामिका बिना कुछ कहे जी गुस्से में अंदर चली जाती है!!

अथर्व अपने कुछ दोस्तो को लेकर निकल चुका था,, गर्मी बहुत थी ओर एक जगह वो सब पानी पीने को रुक गए,,तभी अरनव ने कहा जो अथर्व का दोस्त था,,अथर्व यार हम उस गांव मै चल रहे है पर किसी ने पहचान लिया तो,,अरे यार मुझे वहां कोई नहीं जानता मै अभी अभी गांव आया हूं,,पर यार तेरे चर्चे तो हर जगह फेमस है,,तभी नील कहता है जो भी अथर्व का दोस्त है,,यार वो राणा जी है यहां के सब जानते ही होंगे उसे,, सारी लड़कियां इसके उपर फिदा है,, तभी अथर्व बोलता है फालतू बात कोई नहीं करेगा वरना अभी घर भेज दूंगा तुम लोगो को हम यहां किसी काम से आए है,,ओर तभी सब चुप हो जाते है,,!!

अनामिका कमरे मै जाकर अकेले ही बडबडा रही थी तभी उसकी सहेली वहां आ जाती है,,क्या हुआ अनु,,क्या बताऊं तुझे क्या हुआ,,अरे वो मुझे सब पता है ये बता तुझे क्या हुआ,,तुझे कुछ नहीं पता जो लड़की ये लोग बता रहे है वो मेरी दोस्त है हम साथ ही कॉलेज मै थे ओर उसे उठाया नहीं है वो अपने गांव के लड़के के साथ भागी है वो दोनो प्यार करते है ओर कल वो शादी कर लेंगे!!

ये सब सुनकर तो खुशबू को चक्कर आ गया,,क्या कह रही है अनु अगर ऐसा हुआ ना तो पता नहीं क्या होगा भूचाल आ जाएगा इस गांव मै उस गांव की बहू कभी नहीं आती!!

क्रमशः

ये कहानी का पहला भाग था समीक्षा करके बताएं कैसा लगा अगला भाग जल्द ही!!

अब आगे....

रात का समय हो गया था ..पूरे गाँव में किट पतंगों की आवाज़ के अलावा कोई आवाज़ नहीं थी ।बस ठाकुर की हवेली के पीछे वाले रास्ते पे कुछ लड़कियों के गहनों की आवाज़ रह रह कर आ रही थी ।

अनामिका अपनी सहेलियों के साथ कहीं जा रही थी ।

खुशबू - ठाकुर साहब ने पकड़ लिया ना अनु तो कमरे में बंद कर देंगे ।

दीपिका - काश नदियाँ के पार कोई हमें भी मिल जाये ।

पुष्पा - इस लड़की से तो बात करना ही बेकार है..काश तुझे वहाँ धोभी घाट वाला धोबी मिले।

खुशबू - चुप करो तुम दोंनो ! एक तो वैसे ही अनु उस नीलिमा को भगा बैठी है ।

अनामिका उसे गौर से देखते हुए - मैंने कब भगाया !

खुशबू- पर तुझे तो पता है ना की उसे वो विनय ही ले भागा ।

अनामिका - वो भागे क्योंकि उनकी जिंदगी । हमें क्या करना ,और वैसे भी हम प्यार को गुनाह नहीं मानते ।

दीपिका - गुनाह नहीं मानती पर पसंद भी तो नहीं है ।

तभी किसी के चलने की आवाज़ आयी ..

अनामिका सबको चुप रहने का इशारा करते हुए बोली - चुप ! परहरेदार देख लेंगे ..चले अब !

इधर अर्थव .. नील ,अर्नव और दीपक के साथ नदी के दूसरे किनारे पे थे ।और रात के वक़्त में उन्हें कोई पहचानता भी नहीं । इसलिए वो छिप के रास्ता ढूंढ रहे थे ।

अर्नव - कहाँ आ गए यार ..इससे अच्छा तो किसी लड़की पे ट्राय करते ।

नील - सही कहा यार ..यँहा ठाकुरों की लड़की को तो देखना भी गुनाह है ।

दीपक - अगर हमारे बीच दुश्मनी ना होती ना तो पक्का मैं तो ठाकुर की लड़की से शादी करता ..सुना है बड़ी खूबसूरत होती है ।

अर्थव उन्हें घूरते हुए बोला - अगर ज्यादा बकैती की ना ..तो पार्वती नदी में ही फेंक देंगे फिर अंदर किसी जलपरी से शादी कर वहीं रह लेना ।

अर्थव के गुस्से को देख शांत हो गए । अर्थव को ना कोई पसंद थी ना उसे इनसब से मतलब था ।वो अपना काम करने आया तो और उसे अंजाम देके ही जाना चाहता था ।

इधर अनामिका और उसकी दोस्त नदी के किनारे आयी और वहाँ पे रखी नाव पे बैठ के ,पार्वती नदी के बीच बने बड़े से बगीचे जिसमें बरगद के पेड़ भी था ,वहाँ आ गयी ।

अब चारों वहाँ बैठ के गप्पे लड़ाने लगी पर अनामिका शांत थी पहली बार ।

पढ़े: चार दोस्तों का जंगल का सफर

Love Stories in Hindi:

दीपक को अनामिका दिखी जो उनकी तरफ पीठ किये खड़ी थी ।भारी लहँगा जो काफी दूर में फैला था । नागिन जैसे घुँघराले बाल जो अभी पीठ पेझूल रहे थे और चाँद की रोशनी में उसका बदन किसी राजकुमारी से कम नही था ।

दीपक हल्के से चिल्ला पड़ा - ये तो चुड़ैल है भाई .. सुना है पहले सुंदर बनती है फिर खा जाती है ।

अर्नव भी डर के दीपक के चिपक गया पर नील और अर्थव को कोई फर्क नहीं पड़ा उन्हें पता था कि रात में ठाकुरो की लड़कियाँ यँहा आती है ।

अनामिका के बाल हल्के हल्के से उड़ रहे थे..अर्थव ने उसे देखते हुए मन में कुछ सोचा और उसके चेहरे पे शरारती मुस्कान आ गयी ।

अर्थव - चलो वहीं चलते है देखे तो सही कौनसा छलावा है ये ।

वो चारों भी अब उसी जगह आ गए । वाकई वो जगह बहुत खुबशुरत थी । नदी के बीच इतनी हरयाली और बड़ा सा पेड़ कहाँ मिलता है आखिर..

किसी के आने की आहट से चारों जल्दी से उठ के नाव की तरफ गयी । अनामिका को छोड़ चारों बैठ गयी । अनामिका का दुप्पटा एक पेड़ की टहनी में फंस गया और इधर नाव उस जगह से दूर जा चुकी थी । उन तीनों का डर के मारे बुरा हाल था ।पर उनको अनामिका का ध्यान नहीं आया था ।

इधर अनामिका ने दुप्पटा निकाला पर तब तक नाव जा चुकी थी । वो आवाज़ भी नहीं लगा सकती थी ।

अर्थव ने उन तीनों को वही रुकने का कहा और खुद बरगद के पेड़ की तरफ बढ़ा ।

किसी के आने की आहट सुन अनामिका ने पहले अपना चेहरा कपड़े से ढका फिर कमर में लगा खंजर निकाला ।

अब दोनों ही पेड़ के आस पास घूम रहे थे ..इस तरफ अर्थव इस तरफ अनामिका ।

अनामिका जब एक चक्कर लगा चुकी ,तो वो एक जगह खड़ी हो गयी और खुद से ही बोली," कोई नहीं है चलो!"

तभी किसी ने उसे पीछे से पकड़ा और उसकी गर्दन पे खंजर रख दिया । इस अप्रत्याशित हमले से अनामिका वहीं जम गई ।

अर्थव का चेहरा इसके कंधे के पास था और एक हाथ अनामिका की कमर पे ..अनामिका को गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर वो कर भी क्या सकती थी ।चाँद की रोशनी में वो दोनो किसी मूर्ति के जैसे चमक रहे थे ।

अब अनामिका ने  अपने खंजर से उसके कंधे पे वार किया पर अर्थव को जैसे कोई फर्क ही नहीं था । अनामिका थोड़े से डर से पीछे हट गई । पर अर्थव ने उसके दोनों हाथों को अपने हाथ से पकड़ा और उसे कमर से पकड़ अपनी तरफ किया । अब बस अनामिका की सुरमयी आँखे दिख रही थी जिनमें ख़ौफ़ तो बिल्कुल नहीं था पर रोष जरूर था ।

अर्थव और अनामिका इतने करीब थे कि हवा भी गुजरने की इजाज़त माँग रही थी । अब अनामिका को दूर से नाव वापिस आती दिखी तो उसने अर्थव के पैर पे  मारा पर उसे फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा । अर्थव सही मायनों में एक योद्धा था जिसपे छोटी मोटी चोटें असर नहीं करती थी ,भले ही अनामिका भी हर पैंतरे में दक्ष थी पर उसके कोमल शरीर का अर्थव पे कोई असर नहीं था ।

अनामिका कसमसाते हुए बोली -  आप जो भी है हमें जाने दीजिए ..वरना...!

अर्थव उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला - वरना क्या ! आप आवाज़ लगाएंगी ! पर सुनेगा कौन !

अनामिका - पहली बार किसी से विनती करते है! जाने दीजिए हमें ..समझ लीजिए किसी परिंदे की आजादी का सवाल है ।

अर्थव उसका चेहरा नहीं देख पा रहा था पर उसकी आँखें ही सीने में धड़कने पैदा करने के लिए काफी थी ।शायद पहली बार था जब उसने किसी को इतने ठहराव से देखा ।

अर्थव उसे देखता रहा ,जब नाव किनारे पे आ गयी तो अनामिका को उसने एक झटके के साथ छोड़ दिया ।अनामिका को लगा जैसे वो एक महफूज कैद से छूट गयी । उसने अब अर्थव को ध्यान से देखा ..हल्की भूरी आँखे ,सुर्ख होंठ,गोरा बदन , गठीला शरीर , जो जैकेट से भी नहीं छुप रहा । जीन्स और रजवाड़ी शूज़ में वो कमाल लग रहा था । कोई और होती तो शायद पिघल ही गयी होती ।

अर्थव  - आपको जाना था न?

अनामिका वर्तमान में लौटी और बिना अर्थव को देखे अपने लहँगे को संभालते हुए नाव में बैठ गयी ।

अर्थव उसे जाते हुए देखता रहा ..

तभी दीपक अर्थव को कहता है क्या हुआ राणा जी आप तो दुश्मन की आंखो में खो से गए थे।

अर्थव- चुप करो यार मै जिस काम के लिए आए है उस पर ध्यान दो वैसे ये नील कहां गया।

नील - यार अर्थव जो लड़कियां अभी आई थी उसमे से एक मुझे भी पसंद आ गई और तुझे तो मिल ही गई वो खंजर वाली बड़ी खतरनाक थी यार।

अर्थव- दूश्मन से इश्क लड़ना तेरे लिए हानिकारक हो सकता है याद है ना सबके पास खंजर है सीने में उतार देगी।

नील - अब डरा क्यों रहा है यार चलो अब चलते है।

अर्थव- पर पता कैसे चलेगा जो लड़की गायब हुई है वो कहा है कौन उसे लेकर आया है क्या हुआ है उसके साथ!

अरनव- ऐसा करते है रात नदी के पास ही गुजारते है कल देखते है क्या होता है।

अर्थव- शायद तू सही कह रहा है और अर्थव वहीं लेट जाता है पर उसे नींद नहीं आ रही थी उसे उसी लड़की का ख्याल बार बार आ रहा था उसकी आंखे अभी तक उसे याद थी..ऐसा उसके साथ पहली बार हुआ था और वो अचानक से उठ गया और बोला हम आराम नहीं करेंगे आज रात ही गावं मै ठाकुर की हवेली मै जाएंगे।।

नील- पर अभी जाना तो खतरे से ख़ाली नहीं है आपकी सुरक्षा हमारी ज़िमेदारी है हम हुकुम को क्या जवाब देंगे।।

अर्थव- हम राणा जी के वंशज है किसी से डरते नहीं है और हमने तो बचपन से बंदूकों से खेला है तुम लोगो के पास हथियार तो है ना।

नील - हा राणा जी सब है हमारे पास ।

अर्थव- यहां हमे हमारे नाम से बुलाओ किसी को पता नहीं चलना मै कोण हूं।।

तभी अर्नव धीरे से कहता है आज तो गए यार पता नहीं क्या होगा और एक अर्थव को देख रहा था।

अर्थव- अगर इतना ही डर लग रहा है तो आया क्यों हमारे साथ और फिर तुझे ठाकुर की हवेली मै जलपरी से मिलवा दूंगा

दीपक- भाई कह तो सही रहा है यार मुझे भी उनमें से एक पसंद आ गई वो साइड वाली पर नाम अभी तक किसी का पता नहीं।।

अर्थव- अब मजाक बहुत हो गया सब अपने हथियार संभाल लेना और याद रहे हमारी इजाज़त के बग़ैर कोई हमला नहीं करेगा।।

नील- वो तो ठीक है पर ठाकुर की हवेली मै हर जगह पहरेदार होंगे अंदर कैसे जाएंगे।

अर्थव- अंदर वहीं से जाएंगे जहां से ठाकुर की लड़कियां बाहर आई थी

दीपक- वाह भाई वाह चलो तो फिर

चारो भी नाव मै बैठकर हवेली की तरफ चल पड़ते है रात का घना अंधेरा छाया हुआ था और चारो ओर जंगल था जिससे होते हुए वो चारो ठाकुर की हवेली पर जा पहुंचे।।

जैसा सोचा था वैसा ही पाया सब ओर पहरदारे बंदूकों से लैस खड़े हुए थे दुश्मन को देखते ही गोली मारने का आदेश था जयसिंह ठाकुर का।।

तभी अर्थव सबको कहता है अपनी गन निकाल लो और अगर जान पर आ जाए तो चला भी देना ये हमारा हुकुम है आगे हम देख लेंगे,, हम सब पीछे के दरवाजे से हवेली मै जाएंगे।।

पढ़े: बेपनाह मोहब्बत प्रेम कहानी

Continue:

Love story in hindi:

ये पार्ट थोड़ा लेट पब्लिश हुआ है। तो कहानी को समझने के लिए आप इसके पहले वाले पार्ट फिर से पढ़ ले

अब आगे...

सब पीछे के दरवाजे से हवेली के अंदर चले जाते है। हवेली इतनी बढ़ी थी कि किसी को पता नहीं चल रहा था कि कहां जाएं ओर कैसे पता लगाएं उस लड़की का।

दीपक- कहां फंस गए यार हम कुछ पता नहीं चल पा रहा है। उपर से अगर किसी ने पकड़ लिया तो हम जान से जाएंगे वो अलग।

अथर्व- मैने तो कहा था जिसको डर लग रहा है वो हमारे साथ ना चले फिर क्यों आया।

अरनव- सही कहा भाई ने एक दम सही बात।

तभी पीछे से किसी कि आवाज आती है ओर वो सब छुप जाते है। अथर्व सबको कहता है अपनी गन निकाल लो सब लगता है पता लग गया उनको।

ओर वो सब वही दीवार के पास छुप जाते है। पर कुछ देर तक कोई नहीं आया तो सबने जाकर देखा तो वह सिर्फ एक बिल्ली थी ओर वो सब हसने लग गए।

अथर्व- ये सबसे ज्यादा अरनव कि फटती है। तू घर पर ही रहता ना यार फोकट हमारे साथ आ गया।

नील- अथर्व मुझे लगता है। हमे उस कमरे मै चलना चाहिए वहां कोई लड़की है। शायद अपने गांव कि हो उसे यही रखा हो इन्होने।

अथर्व- ठीक है मै वहां जा रहा हूं तुम लोग बाहर ही रहो कुछ होता है तो मुझे बता देना।

अथर्व अंदर चला जाता है पर वहां रोशनी कम होने कि वजह से उसको कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

अथर्व- पता नहीं यार कोई दिख भी नहीं रहा यहां कोई नहीं रहता क्या लगता है भूतो की हवेली है ये।

वो अकेला ही बोल रहा था तभी किसी से टकरा जाता है। ओर पीछे मुड़कर देखता है तो वो अनामिका ही थी। अनामिका कुछ बोल पाती इससे पहले ही अथर्व ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और उसे दीवार से लगा दिया।

अथर्व- देखो चिल्लाना मत हम यहां किसी काम से आए है हम तुम्हे कुछ नहीं करेंगे।

अथर्व उसकी आंखो मै देख रहा था ओर वो पहचान गया था कि ये वही लड़की जिसको उसने देखा था।

इतने ही मै हवेली कि लाइट जल जाती है क्युकी नीचे बहुत शोर हो रहा था। जैसे ही लाइट जली अथर्व ओर अनामिका एक दूसरे को पहली बार देख रहे थे। मिल तो पहले भी चुके थे पर एक दूसरे से अनजान।

अथर्व बस अनामिका को देखे जा रहा था ओर अनामिका भी दोनों एक दूसरे के बहुत करीब थे। तभी अनामिका की सहेलियां वहां आ जाती है।

ओर दोनों को एक साथ देख लेती है। अनामिका -अथर्व को अपने आप से दूर करती है।

पुष्पा- तूने बताया क्यों नहीं तेरा कोई बॉयफ्रेंड है ओर तुम उसे मिलने भी बुला लिया कॉलेज मै तो कहा करती थी कोई नहीं है।

अनामिका- अरे ऐसा कुछ नहीं है ये जबरदस्ती घुस आया है अभी खबर लेती हूं इसकी।

अनामिका अब उसके पास जाती है ओर कहती है। बता दो कौन हो ओर क्या लेने आए हो घाट पर से हमारा पीछा कर रहे हो ना तुम।

तभी अथर्व के दोस्त भी वहां आ जाते है। अब सारे एक दूसरे से लडने लग जाते है।

तभी अथर्व कहता है चुप हो जाओ यार सब,,सब तो चुप हो गए थे पर अनामिका अभी भी बोले जा रही थी।

अथर्व उसकी ओर देखता है ओर उसके लबों पर उंगली रख देता है।

अथर्व- अब सब पहले मेरी बात ध्यान से सुन लो। हम पास के गांव से आए है। तुम लोगो ने हमारे गांव कि लड़की को उठा लिया है। ओर हम उसे लेने आए है।

अनामिका- इल्जाम लगाने से पहले सोच लो तुम किस के सामने खड़े हो ओर किससे बात कर रहे हो।

अथर्व- मुझे कोई शौक नहीं जानने का तुम कोई भी हो मुझे फर्क नहीं पड़ता मै बस अपने काम से आया हूं।

अनामिका- ज्यादा अकड़ दिखा रहे हो तो निकलो अभी यहां से बड़े आए

अथर्व- ठीक है। चलो रे सब मुझे इस छिपकली कि मदद कि कोई जरुरत नहीं है।

नील- देखिए आप जो कोई भी हो आप अगर उस लड़की के बारे मै जानती हो तो बता दे

अनामिका- बता दूंगी पहले तुम्हारे दोस्त से कहो माफी मांगे

दीपक- सपने देखना छोड़ दो वो कभी माफी नहीं मांगता

अनामिका- ठीक है खुद पता लगा लो

अथर्व- हा हम खुद पता लगा लेंगे तुम्हारी कोई जरुरत नहीं है

खुसबु- अनु यार बता दे ना शायद ये उस लड़की कि जान बचा ले।

अनामिका- हा ठीक है तो सुनो! वो लड़की हमारे गाव के लडके से प्यार करती है इसलिए भागी है। क्युकी यहां तो प्यार करना गुनाह है। तो क्या करती बेचारी ओर हमे ये सब पता है क्युकी वो हमारी दोस्त है। उसने हमे सब बताया था कॉलेज मै।

अथर्व- अच्छा तो ये बात है। ( मन मै सोचता हुआ)

तभी पुष्पा नीचे से भागती हुई उपर आती है।

अनामिका - क्या हुआ इतनी जल्दी भी क्या पड़ी है तुझे

पुष्पा- अरे वो नीचे ना उन दोनों को पकड़ लिया है। ओर तुम्हारे बापू सा ना हुकुम दिया है कि दोनों को कल फांसी दे देंगे।

अनामिका- ये क्या कह रही हो यार ऐसा नहीं हो सकता

पुष्पा- ऐसा हो चुका है। अनमिका

अथर्व- अच्छा तो इसका नाम अनामिका है

अनामिका- तुम क्या सोच रहे हो अब तक तुम तो उन्हे बचाने आए थे ना तो उन्हे बचा लो ना हम किसी को मरते हुए नहीं देख सकते।

अथर्व- अब हमें यहां से चलना चाहिए

नील- पर अथर्व उन दोनों कि जान

अथर्व- हमें कोई मतलब नहीं उनसे चलो यहां से अब

अनामिका, अथर्व के पास आती है और उसे कॉलर से पकड़ कर अपनी ओर खीच लेती है। ओर कहती है हमने तो तुम्हे बहादुर समझा था पर अफसोस तुम तो एक बुजदिल निकले को छोड़कर भाग रहे हो।

अथर्व कुछ नहीं कह रहा था वो बस अनामिका की आंखो में देख रहा था। ओर अनामिका को खुद से दूर करते हुए बोला तुम्हे जो समझना है समझ सकती हो मुझे किसी से फर्क नहीं पड़ता है।

अथर्व ओर बाकी सब वहां से जा चुके थे। अनामिका की आंखो मै आंसू थे क्युकी वो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती थी।

नील- आपने ऐसा क्यों कहा उस लड़की से कि आप कुछ नहीं करने वाले जबकि हम तो उसे बचाने ही आए है।

अथर्व- सवाल सुनने कि आदत नहीं है मुझे तुम्हारे हर सवाल का जवाब कल मिल जाएगा बस ये रात कट जाने दो ओर सवेरा होने दो।

सभी लोग हवेली के बाहर खाली पड़ी जगह मै लेट जाते है
पर अथर्व अभी भी अनामिका के बारे मै सोच रहा था। आज तक किसी ने उससे ऐसे बात नहीं कि। जब उसने उसकी आंखो मै देखा तो लगा जैसे वो कुछ कहना चाहती है। एक खालीपन था जो साफ दिखाई दे रहा था।

क्रमशः
सवेरा हो चुका था ओर सर्दी कि हल्की सुनहरी धूप अनामिका के चहरे पर पड़ रही थी। जो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढ़ा रही थी।

अनामिका उठती है ओर नीचे जाती है हर ओर बहुत शोर था नीचे सब लोग इकट्ठा हुए थे ओर सामने कि तरह ठाकुर साहब ओर अम्मा जी बैठे हुई थी। सबको पता था आज यहां क्या होने वाला है पर किसी कि हिम्मत नहीं थी जयसिंह के सामने कुछ भी बोल पाने की इसलिए सब चुपचाप बैठे हुए थे।

अनामिका ये सब देखकर वापस ऊपर चली जाती है क्युकी उसे ये खेल देखने को कोई शोक नहीं था जहां पर किसी कि जान ली जाती हो।

तभी एक नौकर आता है ओर कहता है। हुकुम सब तैयारी हो गई है आप कहो तो उन दोनों के ले आए।

जयसिंह: हा ठीक है ले आओ ओर आग लगा दो यहां ओर ओर लटका दो उन्हें इस रस्सी से ताकि कोई दुबारा ऐसा करने कि हिम्मत भी ना कर सके।

ठाकुर के हुकुम पर दोनों को लाया जाता है सब चाहा रहा थे कुछ बोल दे,, बचा ले उन्हें पर हिम्मत किसी कि नहीं थी कुछ भी बोलने कि।

अथर्व- तुम सबको पता है ना तुम्हे क्या करना है जैसा कहा है वैसा ही करना ओर हमे वहीं पर मिलना मै इन दोनों को लेकर वहां आ जाऊंगा

नील - ठीक है हुक्म आपने जैसा कहा है वैसा ही होगा

दोनों को रस्सी से बांध दिया जाता है ओर नीचे आग लगा दी जाती है। ओर हुक्म दिया जाता है कि दोनों को लटका दो फांसी पर।

तभी अथर्व वहां पर आ जाता है ओर गोली चला देता है। जिससे कि दोनों की रस्सी टूट जाती है ओर वो दोनो नीचे गिर जाते है। अथर्व उनके पास जाता है ओर उन दोनों को आग से निकाल लाता है।

सब हैरानी से देख रहे थे कि ये कौन है जिसे अपनी जान कि परवाह तक नहीं है। तभी अनामिका भी गोली कि आवाज सुनकर बाहर आ जाती है। अथर्व एक नजर अनामिका को देखता है। तभी सारे आदमी उसे चारों ओर से घेर लेते है। ओर सर पर बंदूक लगा दी जाती है।

जयसिंह- कौन हो तुम ओर तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम हमारे यहां आकर हमारे दुश्मन को बचा लो आज तुम भी इनके साथ ही मरोगे।

अथर्व- हमे मार सके ऐसा तो कोई आज तक पैदा ही ना हुआ ओर रही बात इनकी तो इन्होंने कोई गुनाह नहीं किया है। इन्हे तो हम यहां से ले जाकर ही रहेंगे तुम अगर हमे रोक सकते हो तो रोक लो।

तभी अनामिका भी वहां नीचे आ जाती है। अथर्व सबके गन प्वाइंट पर था। तभी अथर्व अनामिका को पकड़ लेता है। ओर अपना खंजर निकालकर उसकी गर्दन पर लगा देता है। ओर सबको कहता है कोई भी आगे आया तो इसकी गर्दन काट दूंगा सब लोग पीछे हट जाते है।

तभी अरनव ओर नील वहां पर गाड़ी लेकर आ जाते है। अथर्व साथ मै अनामिका को भी गाड़ी मै बिठाकर ले जाता है।

अनामिका- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमे हाथ लगाने कि

अथर्व- मुझे शोक भी नहीं है हाथ लगाने का पर करना पड़ा क्युकी इनकी जान बचानी जरूरी थी।

अनामिका- इनकी जान के लिए ही हम चुप है वरना हमारा खंजर अब तक तुम्हारे सीने के पार होता।

ये सुनते ही अथर्व गाड़ी रोक देता है ओर अनमिका को गाड़ी से नीचे उतार देता है। ओर उसे अपनी ओर खीचते हुए बोलता है। खंजर की क्या जरुरत तुम्हारी आंखे ही काफी है। ओर मैने कहा था ना मै अपना वादा जरुर पूरा करता हूं। ये कहकर अथर्व गाड़ी मै बैठ जाता है ओर वो सब वहां से निकल जाते है।

तभी ठाकुर के लोग वहां आते है ओर अनामिका को भी गाड़ी मै बिठाकर घर ले जाते है।

अथर्व- तुम दोनों अगर प्यार करते थे तो बता सकते थे ना ऐसा करने कि क्या जरुरत थी।

कंचन- हुकुम आप तो जानते हो यहां प्यार का मतलब क्या है। हमारी जान ले ली जाती अब आप हमे यहां से कहीं दूर जाने दीजिए।

नील- क्या तुम्हे राणा जी पर भरोसा नहीं जो ऐसा कह रही हो।

अथर्व- सही तो कह रही हो वो नील हम हर वक्त उनके साथ नहीं रह सकते ठाकुर के आदमी इन्हे कभी भी मार सकते है।

नील- पर हमे बड़े हुकुम को क्या जवाब देंगे

अथर्व- उन्हें हम समझ देंगे

नील- ओर गांव वाले

अथर्व- हम कोई राह चलते राहगीर नहीं है जो हर किसी को जवाब देते फिरे ओर मुझे सवाल सुनने कि आदत नहीं है जो कह दिया सो कह दिया

तुम दोनो यहां से कहीं दूर चले जाओ ओर हमारी जरुरत हो तो हमे कॉल कर देना मै हमेशा तुम्हारे साथ हूं

अथर्व- तुम तीनो गाड़ी लेकर चले जाओ मै आ जाऊंगा

दीपक- पर तू आएगा कैसे ओर हम तेरे पापा को क्या कहेंगे तू हमारे साथ चल ना

अथर्व- तुम सब जाओ ना यार मै आ जाऊंगा पापा से कहना मै ठीक हूं जाओ अब

सब लोग गांव कि तरफ निकल जाते है।

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क्रमशः

Love story in hindi

सब लोग गांव मैं आ जाते है पर अथर्व अभी तक नही आया था। और जैसे ही सब लोग हवेली के अंदर जाते है तो सब लोग अथर्व के बारे मैं पूछते है। की कहा है वो कैसा है क्या हुआ।

तभी अथर्व के पापा वहा आते है और कहते है। कहा है वो हमने तुम सबके के भरोसे उसे छोड़ा था अगर उसे कुछ हुआ तो तुम भी आज जिंदा नहीं रहोगे याद रखना।

तभी अथर्व वहा आ जाता है। मुझे कुछ नही हुआ पापा मैं ठीक हूं।

मल्हार- और उस लड़की का क्या हुआ जिसको लेने गए थे जिस काम के लिए तुम्हे वहा भेजा था वो हुआ या नहीं।

अथर्व- वो दोनो भाग गए

मल्हार - तुम्हारे रहते हुए वो भाग गए सच बताओ क्या हुआ, क्युकी तुम अपना काम कभी अधूरा नही छोड़ते।

अथर्व- पापा वो दोनो एक दूसरे से प्यार करते थे इसलिए मैने उन्हे जाने दिया अब मैं इसके आगे एक और सवाल का जवाब देना नही चाहता।

अथर्व ये सब कहकर वहा से चला जाता है। और अरनव और दीपक भी उसके पीछे जाते है। तो नील भी जाने लगता है पर मल्हार उसे वही रोक लेते है।

मल्हार - नील आज रात को जश्न है याद है ना और अथर्व को वहा लाना और उसकी सुरक्षा का ध्यान रखना तुम्हारी जिम्मेदारी है।

नील - आप चिंता ना करे हुक्म हम हर पल उनके साथ है और वैसे भी उन्हें किसी की जरूरत नहीं है।

मल्हार - जनता हु मै पर एक बाप का दिल है मानता ही नहीं है।

अथर्व अंदर जाकर अपनी मां से मिलता है। और वही जाकर उनकी गोद मैं सो जाता है। तभी नील भी वहा आ जाता है।

मैना ( अथर्व की मां) - क्या हुआ बेटा आज इतने परेशान क्यों हो और ये कितनी मिट्टी लगी है कहा से आए हो तुम सब कहा गए थे।

दीपक - अरे चाची हम सब पास के गांव मैं गए थे वो है ना तभी अथर्व उसे चुप करा देता है।

अथर्व- अरे मां कुछ नही बस पास के गांव घूमने गए थे कुछ नही हुआ आप खाना बना दो बहुत भूख लगी है।

मैना- हा बेटा अभी लगाती हूं रुको

उनके जाने के बाद अथर्व दीपक पर बहुत गुस्सा करता है। क्या जरूरत है मां को ये सब बताने की,, आगे से ध्यान रहे ऐसी गलती नही होनी चाहिए और हम कोन है ये किसी को पता नही लगना चाहिए जब तक हमने अपने मकसद मैं कामयाब ना हो जाए तब तक हम वो राज किसी को नही बता सकते है।

नील - तुम चिंता मत करो अथर्व तुम कौन हो क्या हो किसी को पता नही चलेगा फिलहाल तो हुकुम का आदेश है की आज के जश्न की तैयारी करनी है। और तुम्हारा आना भी जरूरी है बड़े बड़े लोग आने वाले है और तुम्हे सबसे मिलना है।

अथर्व- हमारा आने का मन नहीं है। कह देना उनसे

नील: पर आना ही होगा तुम्हे क्युकी अभी भी बहुत सारे काम बाकी है और सब लोगो से मिलना भी है।

अथर्व: ठीक है मैं तैयार होकर आता हु तुम सब भी तैयार रहना और सतर्क रहना समझे।

अनामिका का घर

जयसिंह: वो कल का आया हुआ लड़का हमसे टक्कर लेने चला है वह जानता नहीं है हम कौन हैं।

अम्मा जी: देखो जयसिंह गुस्सा करने से कुछ भी नहीं होगा हमने सोच लिया है उसका क्या करना है आखिर फिर हमारी बेइज्जती का बदला तो हम लेकर ही रहेंगे।

जयसिंह:: आप क्या करने वाली है अम्मा जी

अम्मा जी: बस तुम देखते जाओ हम क्या करते है तुम्हे फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है बड़ा जश्न मना रहे है ना वो लोग आज मैं देखती हूं कैसे वो लोग जश्न मनाते है। तुम अब जाओ हम सब कर देंगे।

जयसिंह वहा से चला जाते है उन्हे तो पता भी नही था की आखिर क्या होने वाला है। तभी अम्मा जी एक लड़की को बुलवाती है। आओ साहिबा तुम्हारा ही इंतजार था।

साहिबा: आओ बुलाए और हम ना आए ऐसा हुआ है क्या कभी हुकुम अब बस आदेश करे क्या करना है।

अम्मा जी: तो सुनो पास के गांव जाना है आज मल्हार राणे की हवेली मे जश्न है और हमे पता चला है तुम्हे वहा बुलाया है। तुम्हे जाकर उस बेटे अथर्व को खत्म करना है।

साहिबा: माफ कीजिए हुकुम हमसे ये नही होगा सुना है राणा जी का बेटा बड़ा ही खतरनाक है। अगर हम पकड़े गए तो जान से जाएंगे।

अम्मा जी: तुम्हे इसकी मुंह मांगी कीमत दी जाएगी अगर हमारा काम कर दिया तो तुम्हे सोने मैं तोल देंगे हम।

साहिबा: ठीक है हुकुम और वैसे भी मर्द जात है उसे फसाना तो आसान होगा मेरे लिए आपका काम हो जाएगा।

ये सब कहकर साहिबा वहा से चली जाती है। तभी किसी की आवाज आती है। और जैसे ही अम्मा जी वहा जाकर देखती है तो दीपिका वहां ही खड़ी थी। उसने सब सुन लिया था।

अम्मा जी: याद रहे लड़की अगर ये किसी को बताया तो अच्छा नही होगा तुम्हारे साथ।

और दीपिका वहा से डरकर भाग जाती है पर वो बहुत परेशान थी की आखिर अनामिका को बताए या नही। तभी अनामिका वहा आती है और उसे परेशान देखकर समझ जाती है की कोई बात जरूर हुई है। पर उसे भी कुछ पता नहीं था की क्या हुआ।

अनामिका:: क्या हुआ है दीपू तू इतनी घबराई हुई क्यू है अगर कोई बात है तो बता मुझे।

दीपिका:: वो मेने सुना है की अम्मा जी ने उस लड़के अथर्व को मारने के लिए यहां से एक लड़की बेजी है।

अनामिका:: ये सब तू क्या कह रही है ऐसा कुछ नही होगा ये झूठ है।

दीपिका:: ये बिल्कुल सच है अनु ऐसा ही हुआ है। वो लड़का तो अब गया समझो।

अनामिका:: पर हम उसे ऐसे नही मरने दे सकते आखिर उसकी कोई गलती नही है। हम कुछ नही होने देंगे उसे कुछ भी नही।

दीपिका:: पर तू क्या करने वाली है।

अनामिका:: अब तू देखती जा बस मेरा नाम भी अनामिका ठाकुर है जो एक बार सोच लेती हू वो करके ही रहती हूं।
मैं आज हूं उनके यहां जाऊंगी।

दीपिका:: पर तू अकेले मैं तुझे ऐसे नही जाने दूंगी अकेले मैं भी साथ आऊंगी।

अनामिका:: अच्छा चल ठीक है तू भी आना पर यहां किसी को हमारी जगह सुलाकर जाना पड़ेगा नही तो बवाल हो जाएगा।

दीपिका:: उसकी टेंशन तू मत कर में सब इंतजाम कर दूंगी तू बस जाने की पूरी तैयारी कर ले की आखिर जाएंगे कैसे हम वहा?

क्रमश:
अब आगे

अनामिका:: ठीक है तो तू सब तैयारी कर ले पर याद रहे हमे वहा उन सबसे पहले जाना है।

दीपिका:: हा हम पहले की तरह पीछे वाले रास्ते से चले जायेंगे पर उनकी हैवली में घुसना आसान नहीं होगा।

अनामिका:: जो आज वहा पर जश्न होगा जिसमे वो लड़की उसे मारने जा रही है हम भी उनके साथ ही जायेंगे तभी उसे बचा पाएंगे।

दीपिका:: एक बार फिर से सोच ले क्या ये सही है।

अनामिका:: अनामिका ठाकुर बार बार नही सोचती अब बस हमे निकालना होगा।

ओर वो दोनो सबको बिना बताए छुपते हुए अथर्व के घर की तरफ निकल जाती है।

अथर्व का घर

अथर्व के घर पर भी सारी तैयारी हो चुकी थी और अब बस सबको शाम के जश्न का इंतजार था। सारे मेहमान और सब लोग आ चुके थे बस सब लोग अथर्व का इंतजार कर रहे थे क्योंकि आज का जश्न उसके लिए ही रखा गया था ताकि वह सबसे मिल सके।

तभी मल्हार नील को आवाज देते हैं और उससे कहते हैं कि अथर्व को समय पर आज के जश्न में ले आए यह उसकी जिम्मेदारी है और नील भी उनसे वादा करता है कि वह उसे ले आएगा।

नील:: अथर्व तुम क्या कर रहे हो सब लोग बस आते ही होंगे और तुम यहां सो रहे हो तुम्हारे पापा बहुत गुस्सा हो रहे है।

अथर्व:: हा तो मेने तो नही कहा था जश्न रखो और वैसे भी फालतू लोगो से मिलने की आदत नही है मेरी मुझे बहुत काम है अगर मेरा मन होगा तो आऊंगा ये कहकर अथर्व दरवाजा बंद कर देता है।

नील बाहर जा रहा था तभी अथर्व की मां आ जाती है और नील को कहती है तुम जाओ हम उसे समझा देंगे वो आ जायगा।

और वो वापस अथर्व के कमरे का दरवाजा खटखटाती है
अथर्व बिना कुछ सोचे समझे बोल देता है मुझे नहीं आना,, तभी मैना जी कहती है मैं हूं बेटा और फिर वो अंदर जाती है।

मैना:: अथर्व तुम्हे आज जाना ही होगा नहीं तो कितनी बैजती होगी तुम्हारे लिए रखा है और तुम ही नही हो

अथर्व:: ठीक है मां मैं आ जाऊंगा

तभी अरनव और दीपक भी वहा आ जाते है और कहते है आज तो लड़किया भी आने वाली है डांस होगा भाई जल्दी से तैयारी कर ले।

अथर्व:: हां तुम लोग नाच लेना उनके साथ मुझे कोई शोक नहीं है इन सब का

तभी नील वहा आता है और कहता है अथर्व मंत्री जी भी आने वाले है।

अथर्व:: तब तो हमारा जाना बनता है नील चलो तुम सब हम आते है अभी।

अनामिका साहिबा के साथ ही थी और वो सब हवेली मैं पहुंच चुके थे। अनामिका ने उनके जैसे ही कपड़े पहन रखे तो इसलिए उसे कोई नही पहचान पा रहा था। वो उन सबका हिस्सा ही लग रही थी।

अब माहोल जम चुका था महफिल सज चुकी थी चारो ओर मंद मंद खुशबू और रोशनी से पूरी हवेली जगमगा रही थी तभी अथर्व का आना होता है और सब लोग उसे देखने लग जाते है।

जैसे ही अनामिका उसे देखती है उसकी नजरें भी कुछ पल के लिए ठहर जाती है। पर फिर सबका ध्यान करके वो उन लोगो के साथ वापस डांस करने लगती है।

मल्हार: ये लो आ गया हमारा बेटा अथर्व राणे और वो उसे सब लोगो से मिलवाते है।

अरनव:: यार नील अथर्व को बोल ना डांस करते है उनके साथ मजा आएगा।

नील:: तुम लोग पागल हो क्या वो थप्पड़ मार देगा हमे

दीपक:: यार तू उससे ऐसे डरता है जेसे वो तेरा बोस हो।

तभी अथर्व भी उनके पास आ जाता है। और कहता है क्या बाते चल रही है बॉयज।

True' love story in hindi:

दीपक :: यार देखना हम लोग नील से कह रहे हैं कि चल डांस करते हैं पर यह कह रहा है कि अथर्व मना करेगा।

अथर्व:: अरे मैं क्या मना करूंगा जाओ जाओ एंजॉय करो पर ध्यान रखना तुम्हारी वजह से किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अनामिका उन सब मैं पीछे खड़ी हुई थी जिसकी वजह से उस पर किसी का ध्यान नही था सब लोग बस साहिबा को ही देख रहे थे।

अथर्व नील से कहता है मेरे लिए एक बीयर लेकर आ तो नील एक बॉटल लेकर आ जाता है और अथर्व वही बैठकर पीने लगता है सब लोग बस जश्न मैं खो चुके थे।

साहिबा मंच से उतरकर अथर्व के पास आती है और उसे वहा ले जाने की कोशिश करती है। पर अथर्व नही जाता वो उसके आस पास ही अब नाच रही थी।

तभी पीछे से अनामिका के गाने की आवाज आती है और और वो उसे सुनकर वहा जाने लगता है तभी साहिबा उसका हाथ पकड़ लेती है उसे ले जाने के लिए पर अथर्व उसे धक्का दे देता है।

सब कुछ साहिबा के प्लान के मुताबिक ही हो रहा था पर उसने जैसा अथर्व को समझा वो वैसा नही निकला अब उसे पता नही चल रहा था की वो क्या करे l।

अथर्व अब अर्णव और नील के साथ मंच पर ही था और जो आवाज उसे आई उसकी नजर उस लड़की को खोज रही थी। अनामिका को पता था अब सही वक्त है कि वो अथर्व को सब बता दे और वो जैसे ही अथर्व के पास आने लगती है। तभी कोई हवेली की लाइट काट देता है।

साहिबा को अब मौका मिल चुका था अपना काम करने का वो खंजर निकलती है और अथर्व की तरफ बढ़ती है अनामिका भी वही आ रही थी। तभी खंजर से किसी के कटने की आवाज आती है और सब और भगदड़ मच जाती है की क्या हुआ।

तभी लाइट आ जाती है और सब सामने का नजारा देखकर हक्के बक्के रह जाते है। अथर्व के हाथ से खून निकल रहा था और खंजर अनामिका के हाथ मैं था। अनामिका को वहा कोई नही जानता था पर अथर्व उसे देखते ही पहचान गया। साहिबा वहा से भाग चुकी थी और सब इस घटना का जिम्मेदार अनामिका को समझ रहे थे

मल्हार:: इस लड़की की इतनी हिम्मत इसने हमारे बेटे को मारने की कोशिश की ओर वो उसकी तरफ बंदूक तान देते है।

अनामिका बीच मैं खड़ी थी और उसके चारो तरफ बंदूक थी दीपिका बहुत डर गई थी पर अनामिका को बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा था। अथर्व सब कुछ देख रहा था तभी एक लड़का आता है और अनामिका का हाथ पकड़कर झटक देता है जिससे अनामिका नीचे गिर जाती है।

तभी अथर्व उस लड़के को थप्पड़ मार देता है और कहता है सब लोग अपनी बंदूके नीचे कर लो। और वो नील को कहता है। नील जरा मेरा पट्टा लेकर आओ जिससे हम जानवरो को मारते है।

दिपिका बहुत डर गई थी उसे लगा अथर्व अब उन दोनो को मारेगा पर जैसे ही नील पट्टा लेकर आता है तो अथर्व उस लड़के को मारने लगता है।

हाथ कैसे लगाया तूने उसे किसने हक दिया तुझे उसे हाथ लगाने का। तो वो लड़का कहता है एक नाचने वाले है वो हाथ लगाया तो क्या हुआ।

तभी अथर्व अपनी गन निकालकर उस पर गोली चला देता है पर मल्हार उसका हाथ उपर कर देते है जिससे वो लड़का बच जाता है।

मल्हार:: क्या कर रहे हो अथर्व वो मंत्री जी का बेटा है कितना मारा है तुमने उसे

अथर्व:: पापा इससे कह दीजिए यह चला जाए यहां से वरना इसके बाप को और इसे दोनो को मार दूंगा मुझे को फर्क नहीं पड़ता ।

मंत्री:: ये क्या हो रहा है राणा जी हमारी इतनी बेज्ज्यती और मेरे बेटे को कितना मारा है इसने वो भी इस दुश्मन की लड़की के लिए ये दूसरे गांव की है।

अथर्व:: चुप हो जा मंत्री अगर एक शब्द और बोला तो तेरी जुबान खीच लूंगा और अथर्व उसके लड़के को अनामिका के पैरो मैं डाल देता है और उससे नाक रगड़कर माफी मंगवाता है।

तभी सब लोग कहते है की मान लिया लड़के ने गलत किया पर हुकुम ये दुश्मन के गांव की है इसने छोटे सरकार पर वार किया है हम इसे ऐसे नही जाने देंगे जिंदा जला देंगे इसे।

अथर्व:: खबरदार जो किसी ने हाथ भी लगाया इसे कोई आगे नही बढ़ेगा।

अनामिका बस अथर्व को देखे जा रही थी वो कुछ नही बोली और अथर्व अनामिका का हाथ पकड़कर उसे बाहर ले जाता है और गाड़ी मैं बिठा देता है।

क्रमश:

Real love story in hindi:

अब आगे...

गांव से थोड़ी जाकर अथर्व गाड़ी को रोक देता है।

अथर्व:: क्या जरूरत थी तुम्हे वहा आने की जबकि तुम्हे पता है की यहां खतरा कितना है फिर भी आ गई बहादुर बनने का ज्यादा शोक है क्या

अनामिका:: ओह एक तो इनकी जान बचाओ उपर से इनके भाषण भी सुनो तू सही कहती थी दीपू आना ही नही चाहिए था।

दीपिका:: पर मैने कब मना किया आने को

अनामिका:: अरे मान ले कहा था तू भी अब बहस करेगी मेरे से

अथर्व:: ओह तुमने मेरी जान बचाई ये कहो मेने तुम्हारी जान बचाई वो खंजर अंधेरे मैं तुम्हे लगने वाला था वो तो मेने तुम्हे देख लिया और हाथ से पकड़ लिया उसे।

अनामिका:: हां हां तुम ही हो बहादुर तो हम यहां अपनी जान पर खेल कर आए उसका कुछ नही।

दीपिका:: लड़ना बंद करो ना यार ये खबर गांव तक चली गई होगी की उस गांव से यहां कोई आया है। अगर हम जल्दी नही पहुंचे तो गए आज।

अथर्व:: तुम फिक्र मत करो मैं तुम्हे समय से जल्दी ही पहुंचा दूंगा।

अनामिका:: हा चलो अब कोई महान काम नही किया तुमने जो ऐसे बड़ी बड़ी बाते कर रहे हो।

अथर्व:: हां नही किया कोई महान काम और मुझे शोक भी नही है करने का।

अथर्व गांव की तरफ तेजी से बढ़ता है। और कुछ ही देर मैं वो सब गांव मैं पहुंच जाते है।

अथर्व:: ये लीजिए आ गया आपका घर मेरा वादा पूरा हुआ में अब चलता हूं।

अथर्व जाने लगता है तभी अनामिका उसे पीछे से आवाज देकर रोक लेती है। अथर्व पीछे मुड़ता है।

अनामिका:: जब सारा गांव हम पर इल्जाम लगा रहा था तब भी तुमने हम पर यकीन किया ये जानते हुए भी की हम दुश्मन है।

अथर्व:: मैं जिस पर एक बार यकीन कर लेता हु ना फिर अगर भगवान भी आकर कहे की वो गलत है। तो भी नही मान सकता और मुझे तुम पर यकीन है पता नहीं क्यू। तुम्हारी आंखों मै सच्चाई दिखती है।

अनामिका बिना कुछ कहे ही अंदर चली जाती है। और अथर्व भी वापस घर की ओर आ जाता है। जहां उसे हजारों सवालों का जवाब देना था।

अथर्व के घर वापस आते ही:

मल्हार:: ये क्या है अथर्व तुमने उसे बचाया उस दुश्मन को पता है ना उन्होंने क्या किया था हमारे गांव के साथ पता है ना।

अथर्व:: हां पापा मैं सब जानता हु उन्होंने क्या किया था पर उसने उस लड़की का तो कोई कसूर नहीं था और बेकसूर को सजा देना कहा न्याय है।

मल्हार:: उसने नही किया तो किसने किया फिर तुम जानते हो।

तभी अथर्व नील को आवाज देता है और वो उस लड़की को ले आता है।

नील:: जैसे ही अथर्व ने हमे हुकम दिया हम फॉरेन इस लड़की के पीछे गए थे राणा जी यही है वो।

मल्हार:: ले जाओ इसे और बंद कर दो इसको फैसला अब हम करेंगे।

अथर्व:: नही पापा अब नही इसका फैसला पुलिस करेगी नील तुम इसे पुलिस को दे आओ।

ये कहकर अथर्व अंदर चला जाता है। और अपने रूम मैं जाकर लेट जाता है।

जो सोचना नही चाहा रहा था बार बार उसी का ख्याल आ रहा था। तभी अर्णव वहा आ जाता है।

अरनव:: क्या हुआ जनाब आज इतने गहरे सोच मैं क्यों डूबा है बता बता कही प्यार व्यार का चक्कर तो नही है ना।

अथर्व:: तू अपना इलाज करवा प्यार और मुझे कभी नही होगा बस वो मैं ऐसे ही उसके बारे मैं सोच रहा था चल छोड़।

तभी मैना जी वहा आ जाती है। बेटा आ जाओ खाना खा लो काफी टाइम हो गया है। और आज जो हुआ उस सबके बाद तो तू बहुत थक गया होगा ना।

अथर्व:: हां मां हम सब आते है आप जाइए

और कुछ देर बाद सब खाने की टेबल पर मिलते है। पर सब चुप चुप बैठे थे क्युकी आज जो हुआ उसका बाद कोई क्या ही कहे।

तभी अथर्व बोलता है। क्यू दोस्तो कल फिर तैयार हो ना मेले मैं चलने के लिए आखिर साल मै एक बार मेला आता है। तभी अरनव कहता है। हां क्यों नही यार जरूर मजा आ जायगा फिर तो कल। और सड़े से माहोल मैं थोड़ी रौनक आ जाती है।

अनामिका का घर

जैसे ही अनामिका अपने कमरे मैं जाती है अम्मा जी उसका वहा इंतजार कर रही थी। और उसके आते ही उसके ऊपर सवालों की बौछार कर देती है।

अम्माजी:: कहा गई थी इतनी रात को हवेली की बहू बेटियां इतनी रात को बाहर नही जाती पता है ना। हमारी ही गलती है जो तुम्हे इतना सर पर चढ़ा लिया बाकी लड़कियों की तरह कैद करके रखना था।

अनामिका:: पर अम्मा हम हम तो....

अम्माजी:: हमे कुछ नही सुनना है अब आज ही जयसिंह से बात करते है जैसा भी लड़के मिले तुम्हारी शादी अब पांच दिन के अंदर करनी है।

अनामिका:: पर हमारी बात तो सुन लीजिए..

अम्माजी कुछ नही सुनती है और अपने पैर पटकते हुए बाहर की तरफ चली जाती है।

दीपिका:: यार अनु तेरी शादी हो जाएगी अब क्या होगा तू हमे छोड़कर चली जाएगी।

अनामिका:: बस कर नौटंकी मैं नही जाने वाली मुझे शादी नही करनी है अभी।

दीपिका:: पर तू अम्माजी को जानती है ना वो कैसी है वो जरूर पांच दिन मैं कर देंगी।

अनामिका:: हम लड़के को ही भगा देंगे केसे कर देगी ज्यादा हुआ तो उठा लेंगे जब लड़का ही नही रहेगा तो फिर कैसी शादी।

दीपिका:: ये तो तूने सही कहा यार वैसे कल मेला है चलेंगे ना।

अनामिका:: मन तो बहुत है जाने का पर आज जो हुआ उसके बाद हम जाने देंगे या नही?

दीपिका:: हा सही कहा यार पर अब कल की कल देखते है ना जो होगा देख लेंगे अभी सो जाते है काफी रात हो गई।

दीपिका सो जाती है पर अनामिका को नींद नही आ रही थी और वो इसलिए खिड़की से चांद को देखने लग जाती है। और चांद की रोशनी मैं उसका चहेरे का नूर और भी बढ़ गया था। अनामिका को भी बार बार ना चाहते हुए भी उसका ख्याल आ रहा था। और वो समझ नही पा रही थी क्या आखिर इन दो मुलाकातों मैं अथर्व ने उस पर क्या असर कर दिया।

क्रमश:

Love story in Hindi:

अब आगे...

अरे अथर्व उठ जा ना यार कितना वकत हो गया है हमें चलना भी है फिर लेट हो जाएगा...

अथर्व:: अरे यार सोने दोना हमें कोनसा वाहा जाकर डांस करना है और दिन मै क्या करेंगे हम रात को चलने वाला है मजा आ जाएगा

नील:: पर रात को हमें जाने देंगे तुम्हारे पापा

अथर्व:: अरे क्यों नहीं जाने देंगे हमें कोन रोक सकता है आखिर बस तुम सब तेयार हो लो चलते है आज रात को ही...और हा बियर भी रख लेना मजा आयेगा

दीपक:: अरे नहीं नहीं मै नहीं पीता भाई हम नहीं पिए हम बजरंग बली के भक्त जो है।

अथर्व:: ठीक है यार अभी सोने दो शाम को देखते है अब अभी जाओ जाओ

अनामिका भी उठ चुकी थी और जैसा की आज सब मेले मै जाने वाले थे वो भी सब जाने वाले थे... पर गर्मी की दोपहरी मै किसी का मन नहीं था कि वो जाए पर क्या करे बाहर जाने का मौका भी कभी कभी ही आता है जिस दिन वो सब जा पाते है।।

अनामिका:: अम्मा जी हम आज मेले मै जाने वाले है

अम्मा जी:: हा ठीक है चले जाना हम कोनसा तुम्हे माना कर रहे है जो पूछ रही हो पर याद रहे की समय से घर आ जाना

अनामिका:: हा हम समय से घर आ जाएंगे

तभी जयसिंह बाहर आते है और कहते है हम सब जाने वाले है इस बार मेले मै और वो भी रात को जाने वाले है

अनामिका की खुशी उस समय देखने वाली थी और वो उसके पापा के गले लग जाती है,,आज सब तरफ खुशी का माहौल था और सब जाने वाले थे और बहुत खुश भी थे।।

बस अब सभी शाम होने का इंतजार कर रहे थे ताकि जैसे ही शाम हो सब मेले के लिए निकल जाए सब की खुशी बहुत ही देखने लायक थी और अनामिका तो बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि उसे मेले में जाना घूमना फिरना बहुत ज्यादा ही पसंद था

अब शाम भी हों चुकी थी और सब मेले में जाने के लिए तैयार थे। अथर्व भी अपने दोस्तों के साथ मेले में जाने के लिए घर से निकल चुका था।।

शाम का मौसम था चारों ओर लाइट लगी हुई थी और मेले के आंनद अपने हि चरम पर था सभी लोग मेले को देखने में व्यस्त थे और बहुत सारी दुकानें लगी हुई थी सब यहां वहां देख रहे थे।।

अनामिका भी अपने परिवार और अपनी दोस्तों के साथ मेले मै आ चुकी थी तब जयसिंग उससे कहते है बेटा आओ जाओ मेला देखो हमें कुछ जरुरी काम है क्युकी वो यहां पर काम ही करने ही आए थे।। ये बात सुनकर तो अनामिका और भी ज्यादा  ख़ुश हो जाती है।

अथर्व भी अपने दोस्तो के साथ वहां आ चुका था और वो भी मेले मै घूम रहे थे उन्हें पर उसे ये पर नहीं था कि आज यहां फिर उसकी मुलाकात अनामिका से होने वाली है।।

अर्णव: ब्रो चल ना यार नाव मै बैठते है बड़ा मजा आयेगा चल चल

दीपक:: अरे उसे डर लगता है वो नहीं जायगा रहने दे अपन चलते है ना यार उसे यही रहने दे

नील:: ये में क्या सुन रहा हूं कि अथर्व राने को नाव मै बैठने से डर लगता है और सभी हंसने लग जाते है।।

अनामिका भी वही थी और वो उनकी बातें सुन लेती है और हंसने लग जाती है अथर्व उसे पीछे मुड़कर देखता है। आज उसने लहंगा पहना हुआ था और खुले बालों में वो हमेशा की तरह कमाल लग रही थी तभी हवा का झोंका आता है और उसके सर से दुप्पटा नीचे गिर जाता है और अब उसके बाल हवा से उड़कर उसके चहरे पर आ रहे थे और वो जोर जोर से हंस रही थी।।

तभी अथर्व अरनव को कहता है: अरे अरनव हमने तो इन्हे नहीं बुलाया था पर देखो ये हमारा पीछे पीछे यहां तक आ गई इतनी बेताबी वो भी दुश्मन से मिलने की गजब है भाई

अनामिका:: दीपिका इनसे कह दो हमें इनसे मिलने का कोई शोक नहीं चढ़ा है और ये जनाब तो नाव मै बैठने से भी डरते है और वो फिर से हंसने लगती है

दीपक:: भाई यार नाक कट जाएगी अब तो बैठना ही होगा चल आ जा

अथर्व:: हा इनसे कह दीजिए हम डरते नहीं है किसी से हम भी बैठेंगे

अनामिका, खुसबू, पुस्पा और दीपिका तीनों नाव मै जाकर बैठ जाती है। और नाव वाला बस अथर्व और उसके दोस्तो का इंतजार कर रहा था!! क्युकी वो जनता था कि अथर्व यहां के राणा जी का बेटा है और ये मेला हर साल उनकी वजह से ही लगता है।।

अरनव:: भाई यार डर तो मुझे भी लगता है इसमें तूने कह तो दिया मैने सुना है इसमें से गिरकर एक जना मर गया था

अथर्व:: अब डरा मत यार कुछ नहीं होगा और फिर वो पुष्पा है ना तू तो उसे पसंद भी करता है चिपक कर बैठ जाना डर लगे तो उसे पकड़ लेना ठीक है,, और वो तीनो उस पर हंसने लग जाते है!

तभी नाव वाला आवाज देता है कि हुकुम आप आ रहे है ना या फिर हम चला दे तो अनामिका कहती है आपके हुकुम तो डर गए भईया जी आप चलिए तभी अथर्व आ जाता है और उसके पास ही बैठ जाता है,, अरनव पुष्पा के पास पर नील खुशबू के पास और दीपक दीपिका के पास बैठा हुआ था ये मन ही मन एक दूसरे को पसन्द करते थे!!

अनामिका भी पहली बार ही इसमें बैठी थी उसे भी पता नहीं था पर डर उसे भी लग रहा था।। तभी नाव वाला नाव चला देता है जैसे ही नाव उपर से नीचे आती है वापस अरनव चिल्लाने लगता है और पुष्पा के गोद में जाकर बैठ जाता है और उसे पकड़ लेता है।।

अथर्व को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था वो बस चोरी छुपे अनामिका को देखे जा रहा था पर अब डरने की बारी अनामिका की थी उसकी भी सांसे तेज तेज चलने लगी और उसने डर के मारे अथर्व की बाजू को जोर से पकड़ लिया और आंखे बंद कर ली उसे पता ही नहीं चला कि कब नाव रुक गई पर वो आंखे नहीं खोल रही थी तो अथर्व कहता है वो बहादुर शेरनी जी नाव रुक चुकी है अब आप हमें छोड़ सकती है।।

तो अब अनामिका को होश आता है और एक अथर्व से दूर होती है और वहां से जाने लगती है पर वापस मुड़कर कहती है हम आपसे एक बात कहता चाहते है तो अथर्व कहता है हा कहिए ना तो अनामिका कहती है आप इतने ज्यादा शरारती हो हमें तो आज पता चला और वो जाने लगती है।।

तभी अथर्व उसका हाथ पकड़ लेता है और कहता है हमें भी आपसे कुछ कहना था आप इतने डरपोक हो हमें आज पता चला और ये कहते ही अथर्व वहां से भाग जाता है अनामिका उसके पीछे भागती है पर वो कहता है में हाथ नहीं आने वाला

तभी पुष्पा और बाकी सब वहां आ जाती है क्या हुआ अनु

अनामिका:: कुछ नहीं पागल लड़का कहीं का पर वो ये कहकर मुस्कुरा जाती है तो सब उसे चिढ़ाने लगती है

पर अथर्व को याद आता है कि उसे पर भी कुछ काम था और वो वापस उसी जगह जाता है जहां अनामिका थी....

Continued

अगला भाग जल्दी है प्रकाशित करूंगा आप हमारे ब्लॉग पर विजिट करते रहे ये कहानी True love story in hindi। Real love story in hindi कैसी लगी मुझे कॉमेंट करके जरुर बताएं अगला भाग मै जल्द ही लिख दू ये कहानी अभी भी अधूरी है!! अगला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें CLICK HERE

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