मित्र की आवश्यकता पर निबंध | Mitra ki Avashyakta Par Nibandh

मित्र की आवश्यकता पर निबंध | Mitra ki Avashyakta Par Nibandh

मित्र की आवश्यकता पर निबंध:: हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब लोग मैं आशा करता हूं कि आप सब बिल्कुल ठीक होंगे आज मैं आपके लिए एक बहुत ही अच्छा निबंध मित्र की आवश्यकता पर निबंध लेकर आया हूं आप यह सब तो जानते ही होंगे कि मित्रता और मित्र हमारी जिंदगी के दो ऐसे पहलू हैं जिन्हें हम कभी भी भूल नहीं सकते।।

मित्र कितना भी बुरा हो चाहे पर हम कभी भी उसे छोड़कर जाने नहीं देते हैं क्योंकि वह मित्र ही होता है जो हमेशा हमें हमारी जिंदगी में सबसे पहले रखता है हर काम में हमारा साथ देता है अच्छा बुरा हमें बताता है इसीलिए मैं आज आपको मित्र की आवश्यकता पर निबंध लेकर आया है जो आपको बहुत ही पसंद आएगा तो चलिए शुरू करते हैं।।

Overview::

  • हमें मित्र की आवश्यकता क्यों होती है?
  • कौन हो सकता है मित्र निबंध?
  • अच्छे मित्र की क्या विशेषता है?
  • सच्चे मित्र की क्या पहचान है उत्तर?
  • दोस्ती का अर्थ क्या होता है?
  • सच्चे मित्र में कौन कौन से गुण होने चाहिए?
  • सच्चे मित्र की परख कब होती है *?
  • सच्चे मित्र की क्या पहचान है?

मित्र की आवश्यकता पर निबंध | Mitra ki Avashyakta Par Nibandh

मित्र की आवश्यकता पर निबंध | Mitra ki Avashyakta Par Nibandh

हमें मित्र की आवश्यकता क्यों होती है?

सबसे पहले तो हमें यह जानना जरूरी है कि आखिर हमें मित्र की आवश्यकता क्यों होती है ऐसी कौन कौन सी परिस्थितियां होती है जहां पर मित्र हमारा साथ दे सकता है जहां पर कोई भी नहीं होता वहा सिर्फ दोस्त होता है वही हमारी पहचान होता है वही समय हमारा साथ देता है पर हमें यह बात जानना बहुत ही जरूरी है कि आखिर हमे मित्र की आवश्यकता क्यों होती है क्यों जिंदगी में मित्र बनाना सबसे जरूरी होता है।।

आज हम मित्र की आवश्यकता पर निबंध लिख रहे हैं तो हम यह भी जान लेते हैं कि हमें मित्र की आवश्यकता क्यों होती है हमें मित्र की आवश्यकता जिंदगी के हर मोड़ पर होती है क्योंकि हमें जब जब लगता है कि हम बहुत दुखी हैं या हमारा साथ कोई भी नहीं दे रहा है।।

हमारे साथ कोई भी नहीं है कुछ भी हमारी जिंदगी में सही नहीं चल रहा है सब आज हमारे पास एक दोस्त होता है तो वह आकर हमसे कहता है कि कल हम चाय पी कर आते हैं और वह हमारे साथ बात करने बैठ जाता है तो हमारी सारी परेशानियों का हल वह आसानी से बता देता है और हमें संभाल लेता है।।

जब भी हम जिंदगी की परेशानियों से अंधकार की ओर जाने लगते हैं तब तब मित्र हमारे जीवन में सवेरा बनकर आता है और हमें उस अंधकार से निकाल ले जाता है और हम से कहता है कि आगे कुछ भी नहीं होगा जब तक मैं तेरे साथ हूं मैं तेरा साथ दूंगा और वह वैसा ही करता है कोई परेशानी हो चाहे परिस्थिति हो या फिर हमारे पास रहने के लिए घर नही हो खाने के लिए पैसे नहीं हो दोस्त हर समय हमारा साथ देता है।।

इसीलिए कहा गया है कि जिंदगी में कुछ कम आओ या मत कमाओ पर ऐसे दोस्त जरूर हम आनी चाहिए जो हमेशा जरूरत पड़ने पर आवश्यकता पड़ने पर आपका साथ दे सकें और आपके लिए किसी से भी लड़ जाए वही दोस्त सच्चे होते हैं वही दोस्त हमेशा हमारा साथ देते हैं।।

हमें इस बात को समझने की भी जरूरत है कि मित्र की आवश्यकता सिर्फ मुसीबत के समय ही नहीं बल्कि खुशी के समय भी होती है क्योंकि जब हम खुश होते हैं तो हमारी खुशी बांटने के लिए भी एक दोस्त चाहिए होता है और वह दोस्ती होता है जो हमारी खुशी में सबसे ज्यादा खुश होता है हर दुख में हमेशा हमारे साथ रहता है।।

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कौन हो सकता है मित्र निबंध?

अब हमारे पास सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि आखिर हमारा मित्र कौन-कौन हो सकता है क्योंकि आज की मित्रता के नाम पर क्या होता है यह तो आप सब जानते हैं आजकल सच्चाई कहीं भी नहीं रह गई है अगर आप सिर्फ झूठ ही झूठ भरा है इसीलिए किसी पर भी यकीन करना आपके लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है।।

ऐसे में हम समझ ही नहीं पाते हैं कि आखिर हमारा सच्चा मित्र कौन हो सकता है इसीलिए हमें यह समझना बहुत जरूरी है। आपको किन लोगों को अपना मित्र बनाना चाहिए और किन लोगों से आपसे मित्रता नहीं करनी चाहिए अगर आपकी उनसे मित्रता है तो आपको उनसे अपनी मित्रता को समाप्त कर देना चाहिए।।

दोस्तों जिंदगी में बहुत तरह के लोग होते हैं और आपको बहुत तरह के लोगों से अपने जीवन में सामना पड़ता है जिनमें से आप कुछ लोगों को अपना मित्र बना लेते हैं और कुछ लोगों को अपना दुश्मन बना लेते हैं और कुछ लोगों को याद भी करते हैं क्योंकि उन्होंने आपके साथ धोखा हुआ होता है और उन्हीं में से आपके कुछ मित्र भी होते हैं जो आपके साथ धोखा कर जाते हैं।।

आपका मित्र वही हो सकता है जो हर समय आपका साथ दे आपका मित्र वही हो सकता है जो मुसीबत में छोड़कर आपको कभी ना भागे आपका मित्र वही हो सकता है जो कभी भी जरूरत पड़ने पर आपसे ये न कहे कि मेरे पास अभी टाइम नहीं है वही आपका सच्चा मित्र हो सकता है और उसी इंसान को आपको अपना मित्र बनाना चाहिए ताकि आप जब भी परेशानी में अपने आप को पाएं तो मित्र आपकी सहायता करने के लिए हमेशा आपके पास आ जाए मित्र की आवश्यकता आपको अपने जीवन मै हर कदम पर पड़ती है।।

अच्छे मित्र की क्या विशेषता है?

मित्र की आवश्यकता तो हमने आसानी से जान ली अब हमें यह भी जानना चाहिए कि अच्छे मित्र की क्या-क्या विशेषताएं होती है। अगर आपको जीवन में सच्चा और अच्छा मित्र मिल जाता है तो फिर आपके जीवन की सारी परेशानियों का अंत आसानी से हो जाएगा।।

क्योंकि यह आप ही नहीं जानते कि मित्र आपकी कहां कहां पर है सहायता कर सकता है और आपको किन किन मुश्किलों से बाहर निकाल सकता है इसीलिए आपको कभी भी अपने मित्र को छोड़कर जाना नहीं चाहिए अच्छे मित्र की क्या-क्या विशेषताएं हो सकती हैं इनमें मैं आपको कुछ बताने जा रहा है।।

अच्छा मित्र कभी भी आपको अकेला छोड़कर नहीं जाएगा अच्छा मित्र कभी भी आपकी हंसी नहीं उड़ाएगा अच्छा मित्र अभी भी आपकी परेशानियों पर आपका मजाक नहीं बनाएगा बल्कि आपका साथ देगा अच्छा मित्र वही है जो हमेशा आपके घर परिवार की मामलों में भी आपकी सहायता करेगा।।

अच्छा मित्र वही है जब आप डिप्रेशन में हूं और वह आपकी सहायता करेगा अच्छा मित्र भाई हो सकता है जो हमेशा आपका साथ देगा पूरी कोशिश करके एक अच्छा मित्र वही हो सकता है जो कभी भी आपसे यह नहीं कह रहा कि तू मेरे से गरीब है मैं तेरे पास पैसे नहीं है एक अच्छा मित्र वही हो सकता है जो कभी भी आपको अपने आप से दूर नहीं करेगा एक अच्छा मित्र वही हो सकता है जो आपको कभी भी आपकी गरीबी का नीची जाति का कभी भी आपको एहसास नहीं दिलाएगा।।

सच्चे मित्र की क्या पहचान है उत्तर?

सच्चे मित्र की पहचान वही है जो हमेशा से कृष्ण सुदामा की रही है अमीर और राजा होने के बाद भी उन्होंने सुदामा की गरीबी का मजाक नही बनाया वह कभी भी नहीं भूले कि उनका एक दोस्त था वह कभी भी नहीं भूले वह अपने दोस्त बहुत प्यार करते थे जो उनसे मिलने आया तो उन्होंने से गरीबी का जिक्र तक नहीं किया बल्कि उसको बिना मांगे ही इतना दे दिया कि उसे कभी भी किसी चीज की जरूरत नहीं पड़ी।।

हम सब जानते हैं कि हम हमेशा श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हैं पर हम यह भी जानते हैं कि आज की दुनिया में कोई भी श्री कृष्ण और सुदामा नहीं बन सकता है और सच्चे मित्र की पहचान क्या होती है यह हम उनसे जरूर सीख सकते हैं।।

सच्चा मित्र वही होता है जो सालों के साथ और अमीर हो जाने के बाद भी या उसके पास कितना पैसा आ जाए वह आपको कभी नहीं भूलता वह आपकी इज्जत हमेशा करता है वह आपकी दोस्ती को हमेशा दिल में रखता है अगर आप 10 साल बाद ही उससे मिलना जाओगे तो वह आपको उसी तरह मिलेगा जिस तरह वह आपसे बचपन में 10 साल पहले मिला करता था।।

दोस्ती का अर्थ क्या होता है?

दोस्तों इस बात का भी अर्थ जान लेने की भी जरूरत है कि आखिर दोस्ती का अर्थ क्या होता है दोस्ती का अर्थ दोस्त मैं छुपा हुआ है दोस्ती का अर्थ वही होता है जिसका कोई भी नहीं होता उसका हमेशा दोस्त होता है इसका साथ कोई भी नहीं देता उसका साथ हमेशा दोस्त देता है।।

दोस्ती तो दिलों का ऐसा बंधन होता है जहां पर किसी से हमें कोई चाहत पैसों की नहीं होती है जहां पर सिर्फ और सिर्फ प्यार का सहारा होता है दोस्ती में हम हमेशा भाई भाई की तरह रहते हैं।।

दोस्ती का अर्थ होता है हम एक मां के बेटे तो नहीं होते हैं पर हमेशा एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं जहां पर आज की दुनिया में भाई भी किसी का साथ नहीं देता वहां हम कभी भी दोस्त का साथ नहीं छोड़ते हैं अगर आपके अंदर यह दोस्ती के गुण मौजूद हैं तो आप दोस्ती का अर्थ भी समझते हैं।।

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सच्चे मित्र में कौन कौन से गुण होने चाहिए?

जब भी हम मित्र की आवश्यकता के बारे में बात करते हैं तो यह सवाल भी जरूर आता है कि सच्चे मित्र में कौन-कौन से गुण होने चाहिए अगर आपको जीवन में एक सच्चा मित्र मिल जाता है तो फिर आपको किसी भी बात की परेशानी अपने जीवन में उठानी नहीं पड़ती है।।

क्योंकि एक मित्र आपके जीवन की सारी परेशानियों को अंत कर सकता है वह एक मित्र ही होता है जो आपके जीवन की सारी परेशानियों को हल कर सकता है इसीलिए आपके जीवन में एक मित्र होना अत्यंत आवश्यक है।।

अगर हम सच्चे मित्र में कौन सी बात करें उस सच्चे मित्र में उदारता होती है उसमें साथ निभाने की प्रवृत्ति होती है उसमें धोखेबाजी नहीं होती है वह अपने दोस्त की पीठ पर छुरा कभी भी नहीं घोपता है वह अपने दोस्त की पत्नी या उसकी गर्लफ्रेंड को कभी भी बुरी नजर से नहीं देखता है।।

उसके घर वालों को अपना मानता है वह अपने दोस्त की बहन को उसकी मां को भी अपनी बहन और मां समझता है यही सच्ची दोस्ती की प्रवृत्ति होती है वही सच्चे दोस्त के गुण होते है
अगर आपके अंदर भी यह कौन है तो आप भी एक सच्चे मित्र हैं और यह गुण आपके अंदर होने ही चाहिए अगर आपके अंदर यह गुण नहीं है तो आप एक सच्चे मित्र नहीं है और आप इन दोनों को अपने अंदर डालने की आदत कर लीजिए।।

सच्चे मित्र की परख कब होती है *?

सच्चे मित्र की परख कब होती है या हमें कैसे पता चलता है कि कोई हमारा सच्चा मित्र है क्योंकि आजकल मित्रता में झूठ मिलाकर परोसा जा रहा है आप जिसको मित्र कह रहे हैं वह असल में आपका मित्र है ही नहीं वह तो आपका साथ बस मित्रता का नाटक कर रहा है और आप को ठगने की कोशिश कर रहा है इसीलिए यह आपको पता होना बहुत ही जरूरी है कि वह आपका मित्र है और कौन आपका मित्र नहीं है।।

सच्चे मित्र की पहचान हमेशा परेशानी के समय होती है जब आपको चारों तरफ से परेशानियों की घेर लेती है और घर वाले भी आपका साथ छोड़ देते हैं तब अकेला आपका दोस्त आपके साथ खड़ा होता है वह आपसे कहता है कि तू टेंशन मत ले मैं सब देख लूंगा हम सब संभाल लेंगे तो वही आपका सच्चा मित्र है और इसी टाइम पर सच्चे मित्र की परख भी होती है

तो आपको अपने जीवन में एक बात हमेशा याद रखनी है कि आपको हमेशा सच्चा मित्र बनाना है क्योंकि एक सच्चा मित्र हजारों रिश्तेदारों से बेहतर होता है इसीलिए आप एक अच्छा और सच्चा मित्र बनाएं और अपनी जिंदगी को और भी आसान खुशहाल और सफल बनाएं।।

अन्य महत्वपूर्ण बातें::

  • कभी भी झूठे दोस्त पर यकीन ना करें
  • दोस्त भी आपको धोखा दे सकता है
  • हमेशा सच्चे लोगों को ही अपना मित्र बनाएं
  • झूठे लोगों से सावधान रहें
  • किसी पर भी भरोसा करने की गलती कभी भी ना करें
  • आज की दुनिया में मां बाप से बढ़कर कोई नहीं होता

मित्र की आवश्यकता पर निबंध:: दोस्तों आपको हमारा आज का निबंध कैसा लगा आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं और इसे अपने दोस्तों परिवार वालों के साथ सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप पर और जहां जहां भी हो सके आप शेयर करने की कोशिश करें ताकि उन्हें भी मित्र की आवश्यकता पर निबंध मिल जाए और वह भी सच्चे और अच्छे मित्र में पहचान कर सकें।।

अगर आप मुझसे कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो आप कमेंट के द्वारा अपने सवाल मुझसे पूछ सकते हैं मैं आपकी हर सवाल का जवाब देने की पूरी कोशिश करूंगा तब तक आप अपने घर में रहिए और इस कोरोना काल में सुरक्षित रहिए और अपनों के साथ रहिए पूरा निबंध पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अलविदा शब्बा खैर फिर मिलता हूं एक नई निबन्ध एक नए आर्टिकल के साथ।।

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